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सभा संचालन प्रशिक्षण कार्यशाला
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के तत्वावधान में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेशकुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में सभा संचालन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन साउथ हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा किया गया। कार्यशाला में महासभा के प्रधान न्यासी सुरेश गोयल, उपाध्यक्ष मांगीलाल बोथरा, कोषाध्यक्ष मदनचंद मरोठी, ट्रस्टी न्यासी नगराज बरमेचा, आंचलिक प्रभारी प्रकाश चंद मालू की गरिमामयी उपस्थिती रही। कार्यशाला में बृहत्तर कोलकाता व शेष बंगाल क्षेत्र से कुल 19 सभाओं के 136 पदाधिकारी व सदस्यों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के उद्घाटन एवं प्रेरणा सत्र में उद्बोधन प्रदान करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- जिनशासन के चार अंग है- साधु-साध्वी, श्रावक, श्राविका, जिनशासन में साधु साध्वी का जितना महत्त्व है उतना ही श्रावक-श्राविका का महत्व है। दोनो एक दूसरे के पूरक है।
श्रावक अपनी साधना करता हुआ धर्म संघ के प्रति मेरा क्या कर्तव्य है जो इसके प्रति जागरूक रहे। तेरापंथ धर्म संघ एक अनुशासित धर्मसंघ है। इसकी प्रवर्धमानता के चार सूत्र है, अनुशासन, समर्पण, एक नेतृत्व व कषायों का अल्पीकरण। प्रत्येक श्रावक धर्मसंघ की मर्यादा व अनुशासन में रहे। अनुशासन का लोप करने वाला सुख व शांति से वंचित रह जाता है। गुरु के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए। आज्ञा में सतर्क ज्ञान में तर्क होना चाहिए। गुरु दृष्टि की आराधना करनी चाहिए। नियमों के प्रति सजग रहना चाहिए। आलोचना निन्दा से बचना चाहिए। कषाय जितने कम होंगे उतना ही व्यक्ति प्रभावशाली होगा। प्रशंसा प्रदर्शन से दूर रहना चाहिए। जैन संस्कारों के प्रति सजग रहना चाहिए। सात्विक जीवन जीना चाहिए' सधार्मिक वात्सल्य का भाव होना चाहिए। पदाधिकारी है उसको जैन धर्म व तेरापंथ धर्म संघ की सामान्य जानकारी होनी चाहिए। प्रकाश मालू ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया । आभार ज्ञापन साउथ हावड़ा सभा के सहमंत्री मनोज कोचर ने किया।