युद्ध, अहिंसा और अणुव्रत पर व्याख्यान में शांति एवं नैतिक जीवन का संदेश

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अहमदाबाद।

युद्ध, अहिंसा और अणुव्रत पर व्याख्यान में शांति एवं नैतिक जीवन का संदेश

इन्स्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी, अहमदाबाद, अणुव्रत लेखक मंच (प्रकल्प : अणुव्रत विश्व भारती) एवं अणुव्रत समिति, अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में गुजरात विश्व कोष भवन, अहमदाबाद में 'युद्ध, अहिंसा और अणुव्रत' विषय पर आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्या साध्वी अणिमाश्री जी_ के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री डॉ. कुमारपालभाई देसाई उपस्थित रहे।  
कार्यक्रम में साध्वी अणिमाश्री जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि विनाश का मार्ग है। भगवान महावीर के अहिंसा, करुणा एवं आत्मसंयम के संदेश को अपनाकर ही विश्व में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने अणुव्रत आंदोलन को व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण की प्रभावी पहल बताया।आज के युद्ध के माहौल में अहिंसात्मक जीवनशैली जीने के लिए अणुव्रत ही सटीक मार्ग है। यदि व्यक्ति अणुव्रतों का पालन करे और संयम को प्रधानता दे तो बंधुत्व का भाव स्वयं मुखर होगा। विशिष्ट वक्ता पद्मश्री डॉ. कुमारपाल देसाई ने कहा कि अणुव्रत केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पद्धति है। उन्होंने नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं तथा आत्मानुशासन को आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए युवाओं को अणुव्रत के सिद्धांतों से जुड़ने का आह्वान किया।
आचार्य श्री तुलसी आचार्य महाप्रज्ञजी के साहित्य व अणुव्रत से वर्तमान युद्ध व हिंसा जैसी समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है। कार्यक्रम में अणुव्रत लेखक मंच के राष्ट्रीय संयोजक जिनेंद्र कुमार कोठारी की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने अणुव्रत साहित्य एवं वैचारिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में नैतिक चेतना के प्रसार के लिए लेखक मंच की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। साध्वी डॉ. सुधाप्रभाजी ने अणुव्रत की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि 'अणुव्रत इंसान को इंसान बनाने का आंदोलन है'। नैतिकता और प्रामाणिकता के उदाहरण भी दिए। अणुव्रत समिति अहमदाबाद की अध्यक्षा डिम्पल श्रीमाल ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिवादन किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संतोष कुमार सुराणा ने किया। आभार ज्ञापन मंत्री मनीषा दक ने किया।