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प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा निर्देशित तथा श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा चेन्नई द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थिति प्रतिनिधियों को उद्बोधन प्रदान करते हुए डॉ. मुनि पुलकितकुमार जी ने कहा- जैन धर्म का नवीनतम संस्करण है तेरापंथ धर्मसंघ। हमारा सौभाग्य है कि हमें अनुशासित तेरापंथ संघ मिला है। अनुशासन और मर्यादा तेरापंथ की शान और पहचान है। इसमें साधु और साध्वियां ही नहीं श्रावक और श्राविकाएं भी संघ एवं गुरु आज्ञा के प्रति निष्ठापूर्वक समर्पित रहते हैं। मुनि श्री ने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के सूत्र प्रदान करते हुए देते कहा कि कार्यकर्ताओं में एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए जैसे चाबी के गुच्छे में हर चाबी का अपना विशेष महत्व होता है वैसे ही हर कार्यकर्ता में अपनी विशेषताएं होती है, ईर्ष्या वृत्ति से बचें। मुनिश्री ने आगे कहा-तेरापंथ की विशेषता है कि यहां एक गुरु और एक विधान है। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार ने मधुर-प्रेरणादायक गीत के माध्यम से प्रेरणा दी। अनेक सत्र में विभाजित व संचालित कार्यशाला में महासभा अध्यक्ष महेंद्र नाहटा, निवर्तमान अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया, उपाध्यक्ष प्रकाश लोढ़ा आदि ने महासभा की विविध प्रवृत्तियों पर सम्पूर्ण जानकारी के साथ सभा संचालन व के प्रत्येक पहलू पर उपयोगी प्रशिक्षण प्रदान किया।स्वागत वक्तव्य चेन्नई सभाध्यक्ष महेंद्र मांडोत ने प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला संयोजक महेंद्र आंचलिया व मनोज गादिया एवं संचालन मंत्री चन्द्रेश चिप्पड़ ने किया।