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अपार श्रद्धा, हर्षोल्लास के बीच चातुर्मासिक मंगल प्रवेश
राजधानी दिल्ली के पीतमपुरा क्षेत्र की पावन धरा पर शुक्रवार को युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती, बहुश्रुत मुनि उदित कुमारजी (ठाणा-3) का मंगल चातुर्मासिक प्रवेश अत्यंत उल्लास के साथ संपन्न हुआ। 'पर्यावरण विशुद्धि यात्रा' के रूप में जब यह विशाल और अनुशासित काफिला पीतमपुरा स्थित चातुर्मास स्थल पर पहुँचा, इस अवसर पर मुनि ज्योतिर्मय जी ने अपने प्रासंगिक एवं सारगर्भित विचार श्रोताओं के समक्ष रखे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए बहुश्रुत मुनि उदित कुमारजी ने अपने पावन उद्बोधन में कहा – 'यह द्विमासिक चातुर्मास हम सभी के लिए आत्म-कल्याण का एक विशेष और स्वर्णिम अवसर है। मैं आप सभी को यही कहूंगा कि इस अवधि में अपने भीतर झांकें और अपनी त्याग व तपस्या के अर्घ्य चढ़ाएं। धर्म, संयम और साधना के मार्ग में कभी भी अपनी 'शक्ति का संगोपन' न करें। अपनी क्षमताओं को छिपाएं नहीं, बल्कि अपनी पूर्ण ऊर्जा, भाव और सामर्थ्य के साथ आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ें।'
इस अवसर पर अनेक गणमान्य लोगों ने मुनिश्री के अभिनंदन में अपने विचार रखें, जिनमें आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष के. एल. जैन पटावरी, जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा उपाध्यक्ष संजय खटेड़, तेरापंथ सभा दिल्ली अध्यक्ष बिमल बैंगानी, तेरापंथी सभा पीतमपुरा के अध्यक्ष लक्ष्मीपत भूतोड़िया, ते.यू.प.दिल्ली अध्यक्ष मनीष महनोत तथा ते.यू.प. गांधीनगर से क्रांति बरड़िया आदि ने भी मुनिश्री के स्वागत में अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। प्रवेश से पूर्व पर्यावरण विशुद्धि यात्रा की भव्य रैली के सुव्यवस्थित संयोजन में अरुण सेठिया का अहम योग रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन पीतमपुरा सभा के मंत्री वीरेंद्र जैन ने किया।