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'एक शाम महाप्रज्ञ के नाम' भक्ति संध्या
गुवाहाटी। प्रेक्षा प्रणेता, युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के 107वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में 'एक शाम महाप्रज्ञ के नाम' भक्ति संध्या का भव्य आयोजन आचार्य महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी (कालू) एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार जी के पावन सान्निध्य में हुआ। सभा अध्यक्ष रितेश खटेड़ ने सभी का स्वागत करते हुए महाप्रज्ञ जी के जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर अपने मंगल उद्बोधन में मुनि आनंद कुमार जी (कालू) ने कहा कि आचार्य श्री महाप्रज्ञ केवल एक संत नहीं, बल्कि विचार-क्रांति के महानायक, प्रेक्षा ध्यान के प्रवर्तक, अणुव्रत के प्रखर संवाहक और मानवता के मार्गदर्शक थे। उनका सम्पूर्ण जीवन संयम, साधना, करुणा, अहिंसा, नैतिकता एवं वैज्ञानिक अध्यात्म का जीवंत संदेश रहा। महाप्रज्ञ जी ने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जीवन जीने की कला के रूप में प्रस्तुत किया। समाज में बढ़ती हिंसा, तनाव में महाप्रज्ञ जी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।