कंटालिया के भाल ने दुनिया को संवारा है

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डॉ. साध्वी परमयशा

कंटालिया के भाल ने दुनिया को संवारा है

आर्य भिक्षु का जन्मोत्सव अन्तर उल्लास जगाएं
कल्लूशां के प्रांगण में अम्बर अमृत बरसाएं
दीपांजी के लाल को शत-शत नमन हमारा है
कंटालिया के भाल ने दुनिया को संवारा है
वसुधा का कण-कण हर्षित है नभ में रवि धंसाएं ॥1।।
बिगुल बजाया सत्य का, शिथिलाचार दूर भगा
आस्था का आलोक पा जिनशासन सौभाग्य जगा
उजला उजला जीवन दर्शन अरमानों में छाएं ॥2।
तेरापंथ अनुशास्ता ने बहुमूल्य अवदान दिए
क्रांतिवीर सरताज ने नित-नए उन्मेष दिए
शांतिवीर सांवरिया स्वामी घट-घट में बस जाएं ॥3।।
कामकुंभ चिंतामणि कल्पवृक्ष की छांह मिली
भक्ति से दर पे आया जीवन की बगिया खिली
तेरापंथ अखिलेश को भावों की भेंट चढ़ाएं ॥4।।
अप्राणों का प्राण वह, अंधेरी ओरी बाबा
अत्राणों का त्राण वह, श्मशानों का वह बाबा
अशरण शरण सहायक प्रभु की बलिहारी हम जाएं ॥5।
ढोला मुक्का भी मिला मुक्ति की इस राह में
हटे नहीं पीछे कभी आत्मशक्ति की चाह में
अन्तर्यामी अन्तर्ममी के शासन में समकित दीप जलाएं ॥6
नंदनवन में साध्वी पान बीकाणा मुस्काएं ॥
लय - जनम जनम का साथ है...