एक गुरु, एक अनुशासन–तेरापंथ की अमरता का महामंत्र! : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 29 जुलाई, 2026

एक गुरु, एक अनुशासन–तेरापंथ की अमरता का महामंत्र! : आचार्यश्री महाश्रमण

तीर्थंकर महावीर के प्रतिनिधि, धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने 'तेरापंथ स्थापना दिवस' के पावन अवसर पर ‘कब तक चलेगा तेरापंथ?’ विषय पर चतुर्विध धर्मसंघ को ओजस्वी पावन पाथेय प्रदान किया। पूज्य प्रवर ने फरमाया कि आचार्य भिक्षु और तेरापंथ एक-दूसरे के पर्याय हैं। भिक्षु स्वामी तेरापंथ के आद्य प्रणेता, प्रवर्तक व प्रथम आचार्य हैं और वे ही इस संघ के जनक हैं। आचार्य भिक्षु के जन्म के पूर्व उनकी माता द्वारा देखे गए 'सिंह' के सपने का उल्लेख किया गया है। आचार्य भिक्षु जैसा तेजस्वी, पराक्रमी और ज्ञानी व्यक्तित्व, जिसने धर्म संघ को नई दिशा दी, उनके लिए माता को सिंह का सपना आना कोई असंभव या आश्चर्यजनक बात नहीं है। यह उनके असाधारण व्यक्तित्व का प्रतीक है।
तेरापंथ को जानने के ३ मुख्य आयाम:
१.तेरापंथ का इतिहास: पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि संघ के गौरवशाली इतिहास को जानने के लिए आचार्य तुलसीकृत 'तेरापंथ प्रबोध', आचार्य महाप्रज्ञ जी की कृतियां, मुनिश्री बुद्धमल जी की 'तेरापंथ का इतिहास' तथा मुनिश्री नवरत्नमल जी रचित 'शासन समुद्र' बेजोड़ ग्रंथ हैं।
२. सिद्धांत और दर्शन : संघ के सिद्धांतों को समझने के लिए 'अनुकंपा की चौपाई' व 'भ्रमविध्वंसनम' जैसे महान ग्रंथ हैं। अभातेममं द्वारा संचालित पाठ्यक्रम इसका सुंदर माध्यम है।
३. मर्यादा और व्यवस्था : तेरापंथ का सबसे अनूठा आयाम है—'एक ही आचार्य के अनुशासन में चलना'।
कब तक अक्षुण्ण रहेगा तेरापंथ?
पूज्य प्रवर ने मर्मस्पर्शी उद्बोधन में कहा कि जब तक हमारी चारित्रात्माएं विशुद्ध चारित्र का पालन करेंगी, स्थानों व मठों की आसक्ति में नहीं फंसेंगी और वस्त्र-उपकरणों की मर्यादाओं के प्रति निष्ठा बनी रहेगी, तब तक तेरापंथ धर्मसंघ इसी प्रकार निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।
युवाचार्यश्री, साध्वी प्रमुखा जी व साध्वीवर्या जी के ओजस्वी वक्तव्य :
१.युवाचार्यश्री महावीरकुमार जी: युवाचार्यश्री ने कहा कि आज का दिन तेरापंथ इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ है। इसी दिन आचार्यश्री भिक्षु ने नव्य-भव्य दीक्षा स्वीकार की थी। अकंप संकल्प के धनी आचार्य भिक्षु के रूप में हमें ऐसे गुरु मिले, जिनके एकछत्र नेतृत्व में संघ निरंतर विकास कर रहा है।
२.साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी: साध्वी प्रमुखा जी ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने सुविधा का मार्ग छोड़कर सत्य का कठिन मार्ग चुना और एक नए इतिहास का सृजन किया। तमाम कष्टों और कठिनाइयों के बावजूद स्वामी भिक्षु न कभी थके, न कभी रुके; वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर आगे बढ़ते रहे।
साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी: साध्वीवर्या जी ने कहा कि तेरापंथ संघ की नींव अत्यंत सुदृढ़ है क्योंकि इसकी स्थापना एक 'आग्नेय पुरुष' द्वारा की गई है। स्वामी भिक्षु दृढ संकल्पी, साहसी और सम्यक पराक्रमी व्यक्तित्व के धनी थे। संघ गान व विशेष भक्ति उपक्रम सामूहिक संघ गान: मुनिवृंद, साध्वीवृंद एवं समणवृंद ने सुमधुर गीतों का संगान किया।