बेटियां जहां जाएं, संस्कारों से  घर को स्वर्ग बना दें : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 01 अगस्त, 2026

बेटियां जहां जाएं, संस्कारों से घर को स्वर्ग बना दें : आचार्यश्री महाश्रमण

'संसार भ्रमण: मोक्ष वरण':
आगम के माध्यम से पावन देशना प्रदान करते हुए नेमानंदन, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने गीली व सूखी मिट्टी के गोले का उदाहरण देकर आसक्ति और अनासक्ति का अंतर समझाया।
१.भोग और त्याग का विवेक: भोगों में उपलेप (लेप) होता है और जो अभोगी (अनासक्त) होता है, वह उपलिप्त नहीं होता। जहां आसक्ति और भोग है, वहां संसार भ्रमण है; जहां त्याग और अनासक्ति है, वहां मोक्ष का लक्ष्य है।
२.मिट्टी के गोलों का दृष्टांत: जिस प्रकार गीली मिट्टी का गोला दीवार पर चिपक जाता है, उसी प्रकार दुर्बुद्धि लोग विषयों से चिपक जाते हैं। विरक्त व्यक्ति सूखी मिट्टी के गोले की तरह पदार्थों का उपयोग करके भी उससे चिपकता नहीं है।
३.साधु और सामान्य जन में अंतर: साधु और गृहस्थ दोनों पदार्थों का उपयोग करते हैं, लेकिन साधु अनासक्ति भाव से उपयोग करता है। आसक्ति का त्याग करने से साधना और अध्यात्म में उच्चता आती है।
४.सुविधावाद से बचने की प्रेरणा: जीवन में सादगी और संयम का बहुत महत्त्व है। शरीर के लिए केवल आवश्यकता भर का उपयोग हो, भोग-विलास के लिए नहीं। बाहरी चीजों से जितना अनाकर्षण रहेगा, अध्यात्म और साधना का विकास उतना ही अधिक होगा।
'इटरनल फुट प्रिंट्स' का विमोचन:
जैन विश्व भारती द्वारा मुनि अनेकांतकुमार जी व साध्वी धैर्यप्रभा जी की संयुक्त जीवनी पर आधारित अंग्रेजी पुस्तक 'इटरनल फुट प्रिंट्स' का आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक को मुनि कौशलकुमार जी और साध्वी सिद्धार्थप्रभा जी ने संयुक्त रूप से लिखा है।
'बेटी तेरापंथ की' मंचनीय उपक्रम व वर्धापना:
ससुराल से पीहर पहुंचीं बेटियों, दामादों और बच्चों ने संगीतमय प्रस्तुतियों से युवाचार्यश्री को वर्धापित किया।
उपक्रम के दौरान 'बेटी तेरापंथ की' संयोजिका कुमुद कच्छारा तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष महेंद्र नाहटा ने अपने विचार रखे।
'धर्म उत्कृष्ट मंगल है': आचार्यश्री का दूसरा पावन बोध:
पूज्य प्रवर ने बेटियों को नए घर को स्वर्ग बनाने और बच्चों में नैतिक-आध्यात्मिक संस्कार सिंचन का संदेश दिया।
१.धर्म की सर्वोच्चता : धर्म उत्कृष्ट मंगल है, जिसके तीन मुख्य प्रकार हैं—अहिंसा, संयम और तप। जिसका मन धर्म में रमा रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।
पद, पैसा और प्रतिष्ठा के मुकाबले धर्म रूपी संपत्ति मिलना सबसे विशेष बात है।
२.युवाचार्यश्री का परिचय व संस्कार निर्माण: आचार्यश्री ने उपस्थित जनसमूह को नवनियुक्त युवाचार्यश्री महावीर कुमार जी का परिचय कराया। पूज्य प्रवर ने प्रेरणा दी कि इस भौतिक युग में बच्चों में अहिंसा, नैतिकता और अध्यात्म के संस्कार आएं, जिससे वे तनाव से मुक्त रह सकें।
३.बेटियों को पावन संदेश: बेटियां जहां भी जाएं, अपने व्यवहार और धर्म-संस्कारों से उस घर को 'स्वर्ग' बना दें। परिवार में शांतिपूर्ण माहौल रहे और यह दो दिवसीय सम्मेलन पूरी निष्पत्ति के साथ संपन्न हो।