प्रश्नकर्ता बनो! जिज्ञासा से ही जाग्रत होती है चेतना : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 02 अगस्त, 2026

प्रश्नकर्ता बनो! जिज्ञासा से ही जाग्रत होती है चेतना : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की पावन सन्निधि में विभिन्न धार्मिक व आध्यात्मिक आयोजनों का गरिमामय क्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य प्रवर के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ।
'जानें षड्द्रव्य को': आगम के माध्यम से पावन देशना :
१. जिज्ञासा से ज्ञान की स्फुरणा : आदमी के मन में उचित प्रश्न उठना चेतना की जागृति का प्रतीक है। प्रश्नकर्ता और जिज्ञासा करने वाला व्यक्ति अनेक जानकारियों से युक्त बनता है।
२. लोक की परिभाषा : जहाँ धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, आकाश, काल, पुद्गल और जीव—ये ६ द्रव्य उपलब्ध होते हैं, वही लोक है।
३. अनंत आकाश और लोक : सबसे व्यापक तत्व 'आकाश' अनंत है। इस अनंत आकाश का एक छोटा सा हिस्सा 'लोक' है, जिसके बाहर का आकाश शून्य समान है।
४. लोक में जीव स्थिति : समस्त प्राणी, अनंत सिद्ध व अरिहंत भगवान, चारित्रात्माएं इसी लोक में विराजमान हैं। नरक और निगोद भी इसी लोक में स्थित हैं।
द्रव्यों का दो वर्गों में विभाजन:
१. प्रथम वर्ग : धर्म, अधर्म और आकाश (ये तीनों एक-एक द्रव्य तथा असंख्य व समान प्रदेशात्मक हैं)।
२. द्वितीय वर्ग : काल, पुद्गल और जीवास्तिकाय (ये तीनों अनंत द्रव्यों वाले हैं)।
द्रव्य और गुण का संबंध:
द्रव्य गुणों और पर्यायों का आश्रय है। सभी द्रव्यों के सामान्य व विशेष गुण केवल द्रव्यों में ही स्थित होते हैं।
उत्तरज्झयणणि आगम का महत्त्व: इस महान आगम में तत्वज्ञान, आध्यात्मिक संदेश, कथानक और घटना प्रसंग समाहित हैं। चारित्रात्माओं को इसका निरंतर स्वाध्याय करते रहना चाहिए।
तपस्या प्रत्याख्यान, पुस्तक लोकार्पण:
१. ४३ की तपस्या की पूर्णता: मुनि नमिकुमारजी ने पूज्य आचार्यश्री के समक्ष उपस्थित होकर ४३ की तपस्या की पूर्णता का प्रत्याख्यान किया।
२. 'फायर इन द सेंट' पुस्तक लोकार्पण : साध्वी तेजस्वीप्रभाजी की कृति ‘फायर इन द सेंट’ (Fire in the Saint) पुस्तक को जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया। साध्वी जी ने अपनी अभिव्यक्ति दी, जिस पर पूज्य प्रवर ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
३.'बेटी तेरापंथ की' सम्मेलन का समापन एवं युवाचार्यश्री का उद्बोधन:
‘बेटी तेरापंथ की’ के चतुर्थ सम्मेलन के दूसरे व अंतिम दिन नवनियुक्त युवाचार्यश्री महावीरकुमारजी ने उपस्थित संभागियों को सम्बोधित किया—
'यह महासभा का ऐसा प्रकल्प लग रहा है, मानो बेटियां सद्भावना का पुल बना रही हैं। यह कार्यक्रम दो किनारों को जोड़ने और सद्भावना को प्रसारित करने का सशक्त माध्यम बना है। हमारा जीवन प्रमाद मुक्त हो तथा स्वयं को धर्म से जोड़कर रखने का निरंतर प्रयास होना चाहिए।'
आचार्यश्री की प्रेरणा: पूज्य प्रवर ने प्रेरणा दी कि जीवन में अहिंसा, संयम और तप के प्रति आकर्षण रहे। मनुष्य जीवन में जितना धर्म कर सकें, करें और जहाँ भी रहें, अच्छा धर्मोद्योत करते रहें।
४.अभातेयुप द्वारा मंत्र दीक्षा एवं श्रावक अभिव्यक्ति ज्ञानार्थियों को मंत्र दीक्षा: अभातेयुप द्वारा आयोजित मंत्र दीक्षा कार्यक्रम में लाडनूं ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों को आचार्यश्री ने पावन मंत्र दीक्षा प्रदान की एवं मंगल प्रेरणाएं दीं।