ज्ञान रूपी जल के लिए 'प्रतिभा' ही सबसे अनूठा पात्र है : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 30 जुलाई, 2026

ज्ञान रूपी जल के लिए 'प्रतिभा' ही सबसे अनूठा पात्र है : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के नवनियुक्त युवाचार्यश्री महावीर कुमार जी के वर्धापना समारोह का दो दिवसीय प्रथम चरण अत्यंत गरिमामय और भव्य वातावरण में संपन्न हुआ। युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी एवं नवनियुक्त युवाचार्यश्री महावीर कुमार जी के एक साथ मंचारूढ़ होते ही विशाल जनमेदिनी और चारित्रात्माओं के जयघोष से संपूर्ण परिसर गुंजायमान हो उठा।
'ज्ञान से मुनि होता है':
उत्तरज्झयणाणि आगम से पावन देशना
१.ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयोपशम: महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी ने 'ज्ञान से मुनि होता है' विषय पर विचार व्यक्त करते हुए फरमाया कि मोक्ष प्राप्ति का मुख्य साधन सम्यक् ज्ञान है। ज्ञानावरणीय कर्म के क्षयोपशम से ही ज्ञान का प्रकाश फैलता है। साधु-साध्वियों और श्रावकों को जब भी समय मिले, स्वाध्याय, मनन और अनुप्रेक्षा में गहराई से पैठना चाहिए।
२. प्रतिभा-प्रज्ञा और स्वाध्याय का महत्त्व : पूज्य प्रवर ने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे जल के लिए बर्तन चाहिए, वैसे ही ज्ञान रूपी जल को धारण करने के लिए 'प्रतिभा-प्रज्ञा' रूपी पात्र आवश्यक है। आगम और महापुरुषों के विचार सुनने-पढ़ने से आत्मा में शुभ भावों का प्रकंपन और विनय की साधना का विकास होता है।
युवाचार्यश्री की ज्ञान-साधना और क्षमताओं की सराहना:
पूज्य आचार्यश्री ने युवाचार्यश्री महावीर कुमार जी की ज्ञान-साधना की सराहना करते हुए फरमाया कि युवाचार्य जी वर्षों से श्रुत की आराधना से जुड़े रहे हैं। पीएचडी, एम.ए. और संघीय पाठ्यक्रमों के साथ वे व्यवस्था पक्ष से भी कुशलता से जुड़े रहे हैं। 'श्रेष्ठ श्रुताधारक' की उपाधि से अलंकृत युवाचार्यश्री की श्रुत, शरीर, वचन और आचार संपदा निरंतर पुष्ट और समृद्ध होती रहे।
साध्वी प्रमुखा जी व गणमान्य संस्थाओं ने दी भावभीनी वर्धापना:
१. साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी : साध्वी प्रमुखा श्री जी ने प्रथम आचार्यश्री भिक्षु एवं आचार्यश्री महाश्रमण जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि युवाचार्यश्री सहजता, निश्चलता, प्रतिभा और आगम-निष्ठा के धनी हैं। उनकी विनम्रता और संयम-निष्ठा सदैव वृद्धिगत होती रहे। २. संस्थाओं एवं चारित्रात्माओं द्वारा अभिवंदना : शासन गौरव साध्वी राजीमती जी, अनेक मुनिवृंद, साध्वीवृंद, समणीवृंद तथा युवाचार्यश्री के संसारपक्षीय परिवार (सुमेर कोचर व परिवार) ने गीतों व ओजस्वी विचारों से वर्धापना दी।
३.केंद्रीय संस्थाओं की उपस्थिति: जैन विश्व भारती (अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़), जेवीबीआई (कुलपति श्री बच्छराज दूगड़), अणुविभा (अध्यक्ष, प्रताप दूगड़), अमृतवाणी, सिरियारी ट्रस्ट, आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान और अणुव्रत न्यास सहित अनेक राष्ट्रीय संस्थाओं के पदाधिकारियों ने युवाचार्यश्री को भावभरी वर्धापना अर्पित की।