रचनाएं
सिद्धपुरुष ने सर्वसिद्धा -2 त्रयोदशी का मान बढाया
सिद्धपुरुष ने सर्वसिद्धा -2 त्रयोदशी का मान बढाया,
ज्योतिचरण की महर नजर ने गण को युवाचार्य बकसाया !
है सौभाग्यशाली ये शासन-2 मिले एक से बढ़ गणमाली-2
गुरुवर महाश्रमण की महिमा जग मे अद्भुत और निराली,
भिक्षु जन्म त्रिशति सम्पूर्ति -2 पर शासन ने आश्वासन पाया,
ज्योतिचरण की महर नजर ने गण को युवाचार्य बकसाया!
समझ न आए किसे बधाऊ कृति को या फिर कलाकार को-2
समाधान पाया भीतर से रही देख बाहरी आकार को
है अद्वैत गुरु मे शिष्य -2 और शिष्य में गुरु समाया
ज्योतिचरण की महर नजर ने गण को युवाचार्य बकसाया
आज दिशाएं विहँस रही है और हवाएँ गाती गीत-2
प्रकृति का कण-2 करता है युवाचार्य को वर्धापित
हम भी करती है वर्धापन -२ चयन गुरु का अति मनभाया
ज्योतिचरण की महर नजर ने गण को युवाचार्य बकसाया
योगक्षेम वर्ष में बांटा गुरुवर तुमने अमृत जी भर -2
पीया अंजुरी भर-2 उन ने जिनका था प्रभु भाग्य सिकन्दर
भाग्य नियंता ने कितनो का-2 निज कर से है भाग्य बनाया
लम्बी सुखमय सन्निधि पाने विभुवर मोरा मन ललचाया
शुभ अवसर पर वर दो विभुवर, जब आयें पाये सुखसाया'