रचनाएं
चयन तुम्हारा, भाग्य खिला है आज हमारा
युवाचार्यवर! चयन तुम्हारा, भाग्य खिला है आज हमारा।
महाश्रमण के अंतेवासी, बने संघ के शुभ्र सितारा।।
मानवता के मुखर मसीहा, गुरु महाप्रज्ञ से पाई दीक्षा।
महाश्रमण के बन विश्वासी, सीखा रखना सदा तितिक्षा।।
बोधपाठ मिला शिष्यों को, पाया सबने सबल सहारा।।1।।
निर्मलतम चारित्र तुम्हारा अप्रमत्त है चर्या सारी।
गुरु इंगित को लक्ष्य मानकर अर्जुन की सी है इकतारी।।
सोते हो या भले जागते, संघ समाधी लक्ष्य तुम्हारा।।2।।
देते हैं हम अहो भाव से, अंतर मन से आज बधाई।
शिष्यों की हर गतिविधि में बस रहे तुम्हारी रहनुमाई।।
कदम बढ़ाओ संघ साथ है, अमर रहो जैसे ध्रुवतारा।।3।।