युगल जोड़ी को समर्पित श्रद्धास्वर

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साध्वी रौनकप्रभा

युगल जोड़ी को समर्पित श्रद्धास्वर

सुगुरु को वंदन शत 2 बार
युवराजा की नियुक्ति कर गण को दिया उपहार
मिला भाग्य से भैक्षवशासन महाश्रमण के शास्ता ,
जिनकी सूझबूझ को अर्पित है जन-2 की आस्था,
महाश्रमण की अनुपम कृति का अभिनंदन बार हजार'
श्रुत रत्नों के तुम हो आकर, धीरज जैसे सागर
ज्ञान, ध्यान दरिया लहराए उपशम रस को पाकर
गाव - नगर - ढाणी - घाटी में गुजें जय -2 कार
गंगाजल सा पावन जीवन, भरता सबमें नव पुलकन
सहज सरलता मोहक मुद्रा, हरती है हर उलझन
गुरु चरणों में विनय समर्पण, तर जाए संसार
युगो-2 तक महाश्रमण की शाश्वत सन्निधि पाए।
युवाचार्य की नई सोच से नव उन्मेष जगाए।
शुभ भावों से आज बधाए पथ दर्शन सुखकार।।