रचनाएं
मुख्यमुनि युवराज बने हैं, तेरापंथ सौभाग्य महान
मुख्यमुनि युवराज बने हैं, तेरापंथ सौभाग्य महान।
यशश्वी भैक्षव में, जुड़ा है। श्रेयस्कर अभिधान।।
श्रीभिक्षुशासन में दीक्षित, मेधा तेरी अतिशायी।
हुए परीक्षित महाप्रज्ञ से, महाश्रमण गुरु वरदायी।।
संघभक्ति, आचार कुशलता -2 विनय समर्पण जीवनप्राण।
श्रेष्ठ श्रुताराधक पद पाया, गुरु किरपा पाई अभिराम।।
अपनी क्षमता को चमकाया, आगम का नवनीत ललाम।
ज्ञान चेतना जागृत तेरी-2 सफल हुए सारे अभियान।।
चादर धवल ओढ़ाई प्रभु ने, सीन निहारा मनहारी।
सक्षम कंधों भार संघ का, इतिहास रचा जय-जयकारी।।
संबोध प्रथम युवराज प्रवर का-2, कृतज्ञता का उत्तम अवदान।
गुरुवर महाश्रमण किरपा से, किया है शिखर पर आरोहण।।
उपहार संघ को दिया प्रभु ने, जय हो, जय हो महाश्रमण।
मंगलप्रज्ञा करे कामना-2 चरण रहे अविरल गतिमान।।
तर्ज - कलियुग बैठा मार कुण्डली