वर्धापना आचार्य श्री महाश्रमणजी के गौरवशाली सक्सेसर

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डॉ. समणी ज्योतिप्रज्ञा

वर्धापना आचार्य श्री महाश्रमणजी के गौरवशाली सक्सेसर

वर्धापना आचार्य श्री महाश्रमणजी के गौरवशाली सक्सेसर,
अभिनंदन! एकादशम अधिशास्ता के गौरवशाली सक्सेसर।
आठ संतानों की भाग्यवान छगनी देवी हैं मदर,
महिमामंडित हो गए हैं सवाईलाल जी फादर।
सुशीला, मधु, संगीता, धर्मिता हैं प्यारी सिस्टर,
मोहनजी, शांतिजी एल्डर व लोकेश हैं यंगर ब्रदर।
लंबा कद, मोहिनी मूरत, हो प्रभावक ओजस्वी स्पीकर,
होती है सभा सुधर्मा गुंजायमान, हे मेलोडियस सिंगर!
गौर वर्ण, उजली चादर, कूल-कूल हो बाइ नेचर,
तेरापंथ के ही नहीं, पूरी मानवता के हो वेलविशर।
आचार्य परंपरा में आप प्रथम हैं डॉक्टर,
जोशीली आवाज़ में श्रोताओं को पिलाते हो जिनवाणी का नेक्टर।
भक्ति में हनुमान व भारीमाल-से हो डेडिकेटर,
भाग्य व पुरुषार्थ के योग से बने हो ग्रेटर,
विलक्षण व्यक्तित्व पर पूरा,धर्मसंघ करता है सिग्नेचर।
एक्सटर्नल और इंटरनल अनुकूल रहे वेदर।
समण श्रेणी की क्वालिटी ओर क्वांटिटी अब बने और बेटर,
लंबे समय तक मिलती रहे गुरुवर की शेल्टर।
शुभं भूयात्, कल्याणं भूयात्, मंगलमय हो आपका फ्यूचर,
वंदना-अभिनंदन, महाश्रमणजी के गौरवशाली सक्सेसर!