ओ गण के नव मधुमास!

रचनाएं

साध्वी अणिमाश्री

ओ गण के नव मधुमास!

भिक्षु जन्म-दिवस पर प्रभु ने रचा नया इतिहास है।
युवाचार्य महावीर मुनिवर, गण के नव मधुमास है।
युवाचार्य महावीर मुनि तुम, भिक्षु की तस्वीर हो।
महाश्रमण प्रभु के पट्टधर तुम, गण की नव तकदीर हो।
अभिनंदन हम करते तेरा, कण-कण में उल्लास है।
योगक्षेम वर्ष में प्रभु ने, गण को दिया है नव उपहार।
योगक्षेम करो हम सबका, दो हमको नूतन आकार।
सर्वस्व समर्पण श्रीचरणों में, फैला नव्य प्रकाश है।
गण के महादिवाकर ने अब, शशिधर का है चयन किया।
सूर्य-चाँद को एकसाथ पा, हर्षित सबका आज हिया।
गुरु के सपने सफल करो तुम, हम सबका विश्वास है।
गण के नवम युवाचार्य की, तेजस्वी है साधना।
स्वस्तिक नए उकेरो गण में, प्राणवान हो शासना।
लिखो सृजन की नई ऋचाएं, मिला विशद आकाश है।
जय-मधवा-सी इस जोड़ी को, डाल रहे थुथकारा हम।
मिले युगल-शासना हमको, निरखें नव्य नजारा हम।
युग-युग जीओ हे युवराजा, अनुगूंजित हर श्वास है।
लय - कलियुग बैठा