रचनाएं
हम सौ सौ बार बधाएं
मनोनयन का अभिनव उत्सव उजले छंद रचाए
हम मंगल दीप जलायें , लो सौ सौ बार बधाएं
महाप्राण श्री महाश्रमण ने करुणा रस से सींचा
दिव्य दृष्टि से परख-निरख भावी का नक्शा खींचा
कर कमलों से सिञ्चित कृति में सूरज चाँद उगाए।।1।।
लो सौ सौ बार ……
दो दो युगनायक पुरुषों ने तेरा रूप संवारा
गण के ताज बने गुरुभक्ति विनय समर्पण द्वारा
वर्धापन की मंगल बेला श्रद्धा थाल सजाएं।।2।।
लो सौ सौ बार ……
धरती अम्बर गीत सुनायें नई उमंगे मन में
श्रद्धा के हम स्वस्तिक आज उकेरे गण प्रांगण में
लगा रोशनी का मेला अलबेला दृश्य दिखाएं ।। 3।।
लो सौ सौ बार ……
सूरज चाँद सितारों की लग जाए तुम्हें उमरियां
भीगा मानस खुशियों से उमडी आनन्द बदरियां
भक्ति रस का बहता झरना क्या उपहार चढाए
लो सौ सौ बार ……