धर्म संघ भावी नेता को पाकर पूर्ण निश्चिंत है

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बीदासर।

धर्म संघ भावी नेता को पाकर पूर्ण निश्चिंत है

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या, समाधि केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी मंजुयशा जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मसंघ के नवनिर्वाचित युवाचार्य प्रवर के मनोनयन के उपलक्ष्य में एक भव्य वर्धापना (बधाई) कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का प्रारंभ साध्वी श्री जी द्वारा नमस्कार महामंत्र के मंगल संगान से हुआ। तत्पश्चात सामूहिक रूप से पार्श्वनाथ प्रभु की स्तुति की गई।
साध्वी श्री जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा— 'हम सभी परम सौभाग्यशाली हैं कि हमें तेरापंथ धर्मसंघ जैसा अनुशासित, मर्यादित, संगठित और व्यवस्थित धर्मसंघ मिला। इसके आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु थे। उन्होंने अपनी त्याग-तपस्या से वीतराग प्रभु के प्रति अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। आप्तवाणी उनके रोम-रोम में रमी हुई थी। उनके आचार-विचार में पूर्ण पवित्रता थी। उन्होंने संघ के भविष्य को उज्ज्वल व व्यवस्थित बनाए रखने हेतु कुछ मर्यादाएँ बनाईं। वे मौलिक मर्यादाएँ आज भी पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं, जिन पर यह संघ सतत गतिमान है।'
उन्होंने आगे कहा— 'इस संघ के यशस्वी आचार्यों ने अपनी तपस्या, साधना एवं श्रम की बूंदों से इसे सींचकर आगे बढ़ाया है। इसमें आचार्य का स्थान तो प्रमुख है ही, उन्हीं के द्वारा चयनित युवाचार्य का स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने यथोचित समय पर अपने उत्तराधिकारी के रूप में मुख्यमुनि श्री महावीर कुमार जी को युवाचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया है, जिससे पूरे धर्मसंघ में अत्यंत खुशी का माहौल बन गया है। पूरा धर्मसंघ अपने भावी नेता को पाकर पूर्ण निश्चिंतता की अनुभूति कर रहा है।'
'युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी मारवाड़ के एक छोटे से गाँव फलौदी (फलसूँड) में जन्मे। लगभग 14 वर्ष की उम्र में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी से संयम स्वीकार किया। संयम की चादर ओढ़ते ही आप आत्माभिमुख बनकर अपनी साधना में लीन हो गए। इसके साथ गुरु-दृष्टि की अखंड आराधना करते हुए आगे बढ़े।
गुरु-द्वय के साये में अपनी विनम्रता, व्यवहार-कुशलता, मिलनसारिता, योग्यता, जागरूकता, कर्तव्यनिष्ठा, मितभाषिता तथा आचार-निष्ठा, गुरु-निष्ठा, आत्म-निष्ठा एवं अनुशासन-निष्ठा से आपने अपने गुरु के दिल में एक अमिट स्थान बना लिया। आपकी इन विलक्षण विशेषताओं एवं अविरल साधना को देखकर आचार्य प्रवर ने आपको योग्य समझा और तेरापंथ के सर्वोच्च पद—युवाचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया। युवाचार्य की आज हम सब मिलकर वर्धापना करते हैं और मंगल कामना करते हैं कि आचार्य श्री एवं युवाचार्य की यह जोड़ी युगों-युगों तक बनी रहे।' इस अवसर पर शासन श्री साध्वी कुलप्रभा जी, शासन श्री साध्वी रमावती जी, शासन साध्वी किरणमाला जी, साध्वी नयश्री जी एवं साध्वी जयंतयशा जी ने भी गीत, भाषण, कविता व मुक्तक द्वारा युवाचार्य प्रवर की अभ्यर्थना की।
तेरापंथ सभा के मंत्री नवनीत बोथरा, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष चिराग बेगानी, महिला मंडल की अध्यक्षा मंजु बोथरा, आदि भाई-बहनों ने गीत, भाषण आदि द्वारा भावाभिव्यक्ति दी। साध्वी इंदुप्रभा जी, साध्वी तीर्थप्रभा
जी एवं साध्वी मानसप्रभा जी ने एक रोचक प्रस्तुति एवं मधुर गीत के माध्यम से अपने युवाचार्य प्रवर की भावभीनी अभ्यर्थना की। कार्यक्रम का संयोजन साध्वी श्री चिन्मयप्रभा जी ने किया।