रचनाएं
अभिनंदन! वंदन स्वीकारो! इस युग के महावीर!
अभिनंदन! वंदन स्वीकारो! इस युग के महावीर!
महाश्रमण करुणा से गण की चमक रही तकदीर।।
रोम-रोम आनंद छलकते, पुलकित मन के पोर,
युवाचार्यवर पाकर छाई गण में हर्ष हिलोर,
गुण सुमनों की सौरभ लेकर बहता सौम्य समीर।।
अभिनंदन! वंदन!...
धन्य धरा फलसुंड आज, धन्य छगनी माताजी,
धन्य सवाईमलजी श्रावक परिकर पूरा राजी,
रत्न अमूल्य दिया संघ को धीर, वीर गंभीर।।
अभिनंदन! वंदन!
जीवन की हर भोर सुहानी नई रोशनी लाएं,
सांझ सुरमई नित संयम के नूतन चांद उगाएं,
शीश झुकाऊं चरण पखारूं लेकर श्रद्धानीर।।
अभिनंदन! वंदन!