रचनाएं
कोचर कुल के कोहिनूर
युवाचार्य महावीर को, हम सब आज बधाएं रे।
करते अभिनंदन तेरा, खुशी मनाएं रे॥
तेरापथ-गण-प्रांगण में, आई आज दीवाली है।
महाश्रमण प्रभु पट्टधर को, पा अभिनव खुशहाली है॥
गण के युवराजा को हम, शीश झुकाएं रे।
महाप्रज्ञ प्रभु से पाया, संयम का तुमने उपहार।
श्रेष्ठ श्रुताराधक को हम, वंदन करते बार हजार॥
पहले मुख्य-मुनि की हम, महिमा गाएं रे।
महाश्रमण गुरुराज ने, युवाचार्य पद बगसाया।
नाम सुन महावीर का, जन-जन का मन हरसाया॥
बहुसुत परिषद संयोजक, मन को भाए रे।
कोचर कुल के कोहिनूर! चमक रहा है तेरा भाल।
मुनिप्रवर महावीर तुम गण के हो भावी गणपाल॥
तुमको पाकर हम अपना भाग्य सराएं रे॥
वीर-गोयम सी यह जोड़ी, युगों-युगों तक राज करें।
गणमाली गण-कलियों में, हर पल नव उल्लास भरें॥
तेरा शासन वरदायी, बढ़ते जाएं रे।
लय - जीवन है पानी