रचनाएं
नव्य नूतन युवाचार्य का गौरव गाएं अपार
सजाएं श्रद्धा का उपहार, नव्य नूतन युवाचार्य का, गौरव गाएं अपार॥
अनुपम आभामंडल तेरा, जग में नव आलोक बिखेरा,
फैला चहुंदिशि दिव्य सवेरा,
मुस्काती नयनों से होता, सबका दिल गुलजार॥
गौरवशाली कुल को पाया, मात-पिता का भाग्य सवाया,
शुभ सुखदायक अवसर आया,
विनय, समर्पित मूरत को पा, पुलकित है संसार॥
गुरु महाश्रमण ने शिखर चढ़ाया, भैक्षवशासन को विकसाया,
युवाचार्य महावीर बनाया,
गुरुकृपा से बन गए हो तुम, हम सबके आधार॥
खुशियों का शुभ दिन यह आया, जन-जन का मन है हर्षाया,
मंगल क्षण यह गदग में आया॥
भाव-विभोर हो करते हिममुनि, भाई का सत्कार,
मुनि आलोक आज बधाता, तुमको बारम्बार॥
लय - प्रभो! यह तेरापंथ महान