रचनाएं
कोटि-2 वंदना अभिनंदन
प्रबल पुण्योदय से मिला नंदनवन सा संघ।
महाश्रमण दरबार में छाया अभिनव रंग।।
नेमासुत चिन्तन मनन गण में हर्ष अपार।
युवाचार्य का मनोनयन दृश्य बड़ा मनहार।।
महाप्रज्ञ कृपा हुई कि दीक्षा स्वीकार।
मुख्य मुनि महावीर है, महाश्रमण उपहार।।
मुनिवर श्री महावीर के सिर पर सजा है ताज।
कोचर कुल का लाडला है हम सबको नाज।।
योगक्षेम बरस का दृश्य बड़ा सुखकार।
चार तीरथ का ठाठ है खुशियां मन अनपार।।
श्री भिक्षु का जन्मदिन आषाढ महिना खास।
युवाचार्य महावीर का मनोनयन दिन आज।।
वर्धापन की शुभ घड़ी, प्रमुदित सकल समाज।
कोड़ दिवाली तप तपो अन्तरमन आवाज।।
महाश्रमण गुरुराज के सक्षम पट्टधर आप।
धीर, वीर, गम्भीरता का ना कोई माप।।
मृदु मोहक मुस्कान ही है तेरी पहचान।
महाश्रमण दृष्टि टिकी, बन गए गण की शान।।