आज धरा खुशहाल, धरती अम्बर मुस्काए

रचनाएं

साध्वी कलाप्रभा

आज धरा खुशहाल, धरती अम्बर मुस्काए

आज धरा खुशहाल, धरती अम्बर मुस्काए।
युवाचार्य श्री के मनोनयन दिवस पर हर्षित पुलकित,
दशो दिशाएं गीत खुशी के गाएं।
आचार्य प्रवर ने संघ को दिया भव्य भव्य उपहार।
तेजस्वी वर्चस्वी युवाचार्यश्री को पाकर दिल में हर्ष अपार,
नयनाभिराम मनोनयन का दृश्य देख जन-जन का मन हरषाए।
शांत प्रशांत मनमोहक व्यक्तित्व आपका,
ऋजुता मृदुता सहज समर्पण शमदम उपशम प्रशस्त आपका।
मंगल भावों से आज बधाएं दिल का पोर-पोर,
खुशियों का सागर लहराए।
संघ की धरती पर आई उजली भोर,
आचार्य प्रवर ने दिखलाया दिव्य नजारा, दिल है हर्ष विभोर।
गुरु कृपा से, लाडनूं की पुण्यधरा पर युवाचार्यश्री को पाकर,
सबके दिल में खुशियों के बादल मंडराए।