रचनाएं
वर्धापन अवसर पर शत-शत अभिनन्दन
मनोनयन कर गुरु ने - २
खोली गण तकदीर ॥ ध्रुप ॥
तात सवाई माता छगनी के जाये
कोचर कुल उजियारे, फैला सुयश समीर ॥१॥
महाप्रज्ञ मुख दीक्षा, जसवल में पाई
समिति गुप्ति में तत्पर, अच्छी बनी नजीर ॥ २॥
महाश्रमण गुरुवर की, महर हुई भारी
धर्म संघ को उपहृत , निर्मल तम तस्वीर ॥ ३ ॥
डाक्टर सरल नम्र हैं, आगम के ज्ञाता
श्रेष्ठ श्रुताराधक है, धीर वीर गम्भीर ॥ ४ ॥
भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी, बोधिदिवस आया
आसाढ़ी तेरस दिन, मिले भाग्य से वीर ॥ ५ ॥
वर्धापन अवसर पर, शत-शत अभिनन्दन
करें कामना प्रतिपल, स्वस्थ रहे शरीर ॥ ६ ॥
तर्ज - आरती