ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की साधना का अमूल्य अवसर

संस्थाएं

गुवाहाटी।

ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की साधना का अमूल्य अवसर

आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी 'कालू' एवं सहवर्ती मुनि श्री विकास कुमार जी (ठाणा-2) का तेरापंथ धर्मस्थल, गुवाहाटी में भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। मुनि आनंद कुमार जी ने चातुर्मास वर्षावास स्थापना अनुष्ठान संपन्न कराया। तेरापंथी सभा गुवाहाटी के अध्यक्ष रितेश खटेड़, महिला मंडल की अध्यक्ष सुशीला मालू, युवक परिषद के अध्यक्ष रोहित सुराणा, TPF के अध्यक्ष पंकज भूरा आदि ने भावपूर्ण शब्दों के माध्यम से मुनिद्वय का अभिनंदन किया। अपने प्रेरणादायी मंगल उद्बोधन में मुनि आनंद कुमार 'कालू' ने कहा कि चातुर्मास केवल चार महीनों का ठहराव नहीं, बल्कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की साधना का अमूल्य अवसर है। यह आत्मनिरीक्षण, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक सुख बाहरी भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की शांति, संयम और साधना में निहित है। संतों का सान्निध्य जीवन को नई दिशा देता है और चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म, स्वाध्याय, सामायिक, प्रेक्षाध्यान तथा सेवा-साधना से जुड़कर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। मुनिश्री ने सभी तेरापंथी संस्थाओं से आह्वान किया कि वे चातुर्मास के दौरान धर्मप्रभावना, संस्कार निर्माण, युवा जागरण, अणुव्रत एवं सेवा कार्यों को और अधिक गति प्रदान करें ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण निर्मित हो सके। मुनिश्री ने तपस्या की मुक्तकंठ से अनुमोदना करते हुए कहा कि तप आत्मबल को जागृत करने का सशक्त माध्यम है तथा ऐसे तपस्वियों से समाज को प्रेरणा मिलती है।