गुरुवाणी/ केन्द्र
'चौरासी लाख योनियों में दुर्लभ है मानव भव, मोक्ष ही जीवन का अंतिम लक्ष्य' : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, धर्म धुरंधर युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने मुख्य प्रवचन में ‘संवेग से क्या मिलेगा?’ विषय पर उत्तरज्झयणाणि आगम के माध्यम से चतुर्विध धर्मसंघ को पावन देशना प्रदान की।
'संवेग से क्या मिलेगा?': दुर्लभ मानव जीवन और अनुत्तर धर्म श्रद्धा–
१. मानव जीवन की दुर्लभता: चौरासी लाख जीव योनियों में परिभ्रमण के बाद जीव को दुर्लभ मनुष्य गति प्राप्त होती है। शास्त्रों में वर्णित ४ दुर्लभ बातें हैं—मनुष्यत्व, धर्म श्रवण, धर्म श्रद्धा और संयम में पराक्रम।
२.आत्मा की अमरता व मोक्ष: शरीर नश्वर है, किन्तु आत्मा शाश्वत है। इसे न छेदा जा सकता है, न जलाया जा सकता है। चार गतियों (देव, मनुष्य, तिर्यंच, नरक) के पार ५वीं गति 'सिद्ध गति' (मोक्ष) है, जहाँ पहुँचने के बाद जीव संसार में पुनः वापस नहीं लौटता।
३. संवेग का परम फल : मोक्ष की तीव्र अभिलाषा (संवेग) से जीव 'अनुत्तर धर्म श्रद्धा' को प्राप्त करता है। जब श्रद्धा प्रगाढ़ हो जाती है, तो साधक प्राण त्यागना स्वीकार कर सकता है, किन्तु अपने धर्म और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटता।
अन्य धर्मों का सम्मान और अडिग आस्था का संदेश–
१. समभाव व सहअस्तित्व : श्रावकों में भी प्रगाढ़ धर्म श्रद्धा होनी चाहिए। अपनी आस्था पर दृढ़ रहते हुए दूसरों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के प्रति राग-द्वेष से परे रहना चाहिए। किसी की अवहेलना या आशातना न हो।
२. अडिगता : कैसी भी विषम परिस्थिति आए, श्रद्धालु अपनी धर्म-श्रद्धा और आस्था पर सदैव अडिग रहे।
विशिष्ट जनों का अभिवंदन:
RSS व पूर्व सांसद की उपस्थिति:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 'कुटुंब प्रबोधन' के अखिल भारतीय संयोजक डॉ० रवीन्द्र जोशी ने पूज्य प्रवर के दर्शन कर अपने श्रद्धाभाव व्यक्त किए। नवी मुंबई के पूर्व सांसद संजीव नाईक ने पूज्यश्री की मंगल सन्निधि में विचार व्यक्त कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।