रचनाएं
आई दीवाली गण में, खुशियां छाई कण-कण में
आई दीवाली गण में, खुशियां छाई कण-कण में,
केसर बरसे मधुवन में, उजली-उजली भोर।।
धोरो की धरती में जन्मे, गण प्रांगण में फले-फूले,
विनय समर्पण से पग-पग पर, सतरंगे शतदल खिले।
दसों दिशाएं विहंस उठी, हर मानस हर्ष विभोर ।।
पारखी नज़रे ज्योतिचरण की, ढूंढ निकाला कोहिनूर,
संघ भाल पर युगों-युगों, आलेख लिखे नूतन भरपूर।
युवराज के राजतिलक से, निश्चिंत बने सिरमौर ।।
बहुश्रुत साधक, श्रुत आराधक, ऋजुता-मृदुता है साकार,
महाप्रज्ञ-सी प्रज्ञा पाए, महाश्रमण श्रम के अवतार।
बनो चिरायु, रहो निरामय, यश सुरभि चहुं ओर ।।
तर्ज - भारत के नौजवानों...