तेरापंथ धर्मसंघ के नवम युवाचार्य, संघ-गौरव, श्रुत-मनीषी : डॉ. महावीर कुमार

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अर्जुन लाल मेडतवाल

तेरापंथ धर्मसंघ के नवम युवाचार्य, संघ-गौरव, श्रुत-मनीषी : डॉ. महावीर कुमार

जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता, महातपस्वी युगप्रधान पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी के नेतृत्व में दूसरा योगक्षेम वर्ष जैन विश्व भारती, लाडनूं में मनाया जा रहा है। इसी दौरान आद्य संस्थापक आचार्य श्री भिक्षु के ३०१वें जन्मदिवस (२८ जुलाई २०२६) पर पूज्य प्रवर ने अपने सुशिष्य मुख्य मुनि डॉ. महावीर कुमार जी को तेरापंथ धर्मसंघ के नवम युवाचार्य पद पर प्रस्थापित कर संघ-इतिहास में नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। आचार्य द्वारा उत्तराधिकारी की नियुक्ति धर्मसंघ की परंपरा और अनुशासन की बागडोर सौंपने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व होता है। पूज्य गुरुदेव ने मुनि श्री महावीर कुमार जी को पहले 'मुख्य मुनि' के रूप में प्रतिष्ठित किया और कसौटी पर शत-प्रतिशत खरा उतरने के बाद उन्हें युवाचार्य पद सौंपा।
विलक्षण प्रतिभा एवं अगाध ज्ञान-साधना
दीक्षा : फलसूंड (शिवांची मालानी) में जन्मे बालक महावीर कुमार ने सन् २००२ में जसोल में प्रेक्षा-प्रणेता पूज्य आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के करकमलों से भागवती दीक्षा अंगीकार की।
श्रेष्ठ श्रुताराधक : धर्मसंघ के सप्तवर्षीय उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त कर वे 'श्रेष्ठ श्रुताराधक' से विभूषित हुए।
अकादमिक शिखर : स्नातक (B.A.) में विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक (यूनिवर्सिटी टॉपर) हासिल किया तथा जैन विश्व भारती संस्थान से M.A. की उपाधि प्राप्त की।
शास्त्रज्ञान व कंठस्थीकरण : दश वैकालिक, उत्तराध्ययन, आचारबोध जैसे अनेक प्रामाणिक ग्रंथों का अगाध पारायण किया। हजारों प्राकृत-संस्कृत श्लोक उन्हें अहर्निश कंठस्थ हैं।
शोध, संघ-सेवा एवं ऐतिहासिक उपलब्धि
समीक्षा परिषद व संस्कार प्रभारी: सन् २०१२ में समीक्षा परिषद के सदस्य बने तथा सन् २०१५ से बाल एवं नवदीक्षित मुनियों के संस्कार निर्माण प्रभारी का दायित्व निभाया।
विद्या वारिधि (Ph.D.): वर्ष २०२२ में 'जैन आगमों में पर्यावरणीय चिंतन : एक अध्ययन' पर Ph.D. की उपाधि प्राप्त की। वे तेरापंथ इतिहास में डॉक्टरेट उपाधि से विभूषित प्रथम युवाचार्य बने।
ओजस्वी वक्ता एवं अनन्य गुरुभक्ति
युवाचार्य श्री का मधुर गीत-गुंजन और ओजस्वी वाणी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। सूरत चातुर्मास में उनके 'जैन रामायण' के व्याख्यानों ने समाज को भाव-विभोर कर दिया था। उनकी गुरुभक्ति अद्वितीय है; यदि पूज्य गुरुदेव 'बिंब' हैं, तो युवाचार्य श्री उनके निश्चल 'प्रतिबिंब'। पदयात्राओं और संघ-संचालन में वे सदैव गुरु-सहयोगी रहते हैं।
विनय, चारित्रिक संपदा एवं मंगल कामना
उत्तुंग शैक्षणिक योग्यताओं के साथ-साथ उनका विनयभाव, सौम्यता, सरलता और अनुशासन जन-जन का मन मोह लेता है। वे गुरुवृंद, साधु-वृंद एवं संपूर्ण श्रावक समाज के प्रति अत्यंत मधुर व आत्मीय व्यवहार रखते हैं। ऐसे प्रखर ज्ञानी एवं विनय मूर्ति युवाचार्य का प्राप्त होना तेरापंथ धर्मसंघ का अहोभाग्य है। मैं नवम युवाचार्य श्री डॉ. महावीर कुमार जी के चरणों में करबद्ध अभिवंदना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायुष्य और अहर्निश आध्यात्मिक विकास की मंगल कामना करता हूँ।