मातृ पितृ देवो भव: कार्यक्रम का आयोजन

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अहमदाबाद।

मातृ पितृ देवो भव: कार्यक्रम का आयोजन

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, अहमदाबाद द्वारा आयोजित एक समसामयिक कार्यक्रम मातृ पितृ देवो भव: का आयोजन युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की प्रबुद्ध शिष्या साध्वी अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, शाहीबाग पर किया गया। 'ग्रंथों में है बतलाया जिनका बड़ा हम पे उपकार है...' सुमधुर गीतिका के माध्यम से साध्वी समत्वयशाजी ने अपने स्वरलहरियों के साथ माता-पिता के महत्व को बताया।
डॉ. साध्वी सुधाप्रभाजी ने प्रासंगिक उद्बोधन देते हुए पितृदेवो भव: पर बताया कि परिवार के स्वप्नों के लिए पिता अपने स्वप्नों को गौण कर बच्चों की हर इच्छाओं को पूर्ण करने का प्रयास करता है। पिता जाते-जाते अपने बेटों को वसीयत और नसीहत आशीर्वाद स्वरूप देकर जाता है। आगे प्रेरणा दी कि पिता का सम्मान करने के साथ उनकी इच्छाओं को पूर्ण करने का प्रयास करें। FAMILY का अर्थ समझाते हुए कहा - Father And Mother I Love You। साध्वी अणिमाश्रीजी ने उपस्थित विशाल परिषद को मार्मिक भावपूर्ण उद्बोधन देते हुए कहा - मां हमारे जीवन का शुभारंभ है।
प्रत्येक दुःख को झेलकर अपने जिगर के टुकड़ों को संस्कारित करते हुए बड़ा करती है। आपने अनेक दृष्टांतों के साथ गणेशजी द्वारा सृष्टि की परिक्रमा करने का दृष्टांत बताते हुए माता-पिता के महत्व को समझाया। आगे कहा - माता-पिता के पास दुआओं का खजाना है, लूटना चाहो जितना लूट लो। उनसे प्राप्त आशीर्वाद और उनके आभामंडल से निकलने वाली किरणें भाग्योदय एवं रक्षा-कवच बन जाएंगी। माता-पिता खुश हैं तो आपका भविष्य सुरक्षित है।
ठाणं सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता , मालिक (आजीविका प्रदाता) एवं गुरु (जीवन की सही राह दिखाने वाले)के उपकारों से उऋण नहीं हो सकते। मां-बाप के कर्ज़ उतारने का प्रयास करें, उन्हें गुरु दर्शन कराएं, आध्यात्मिक सद्गति में सहायक बनें। साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने संचालन करते हुए बताया कि घर का गौरव मां है जो संस्कार सिखाती है, और घर का अस्तित्व पिता है जो संघर्ष करना सिखाता है। इस अवसर पर भिक्षु भजन मंडल द्वारा नवमनोनीत नवम युवाचार्य महावीर की वर्धापना में गीतिका का मंगल संगान किया गया।