चतुर्मास का समय धर्म-ध्यान करने का सर्वोत्तम अवसर

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मालवीय नगर, जयपुर।

चतुर्मास का समय धर्म-ध्यान करने का सर्वोत्तम अवसर

राजधानी जयपुर के मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में रविवार को भारी उत्साह और धर्म-ध्यान के माहौल के बीच मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरुण' एवं मुनि संभव कुमार जी का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर एक भव्य 'योगक्षेम रैली' का आयोजन किया गया, जिसमें तेरापंथ समाज के सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे उल्लास के साथ सहभागिता की। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि तत्त्व रुचि जी 'तरुण' ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को अपना चातुर्मासिक संदेश प्रदान किया। उन्होंने कहा, 'चातुर्मास ज्ञान, दर्शन, चारित्र, और तप-संयम साधना का स्वर्णिम अवसर है।' मुनिश्री जी ने एक बेहद सुंदर दृष्टांत देते हुए समझाया कि जिस प्रकार बारिश का मौसम किसानों के लिए खेती करने का मुख्य समय होता है, ठीक वैसे ही धार्मिक जनों के लिए यह चतुर्मास का समय धर्म-ध्यान करने का सर्वोत्तम अवसर होता है। उन्होंने कहा कि किसान की खेती का लक्ष्य जहाँ अनाज प्राप्त करना होता है, वहीं धार्मिक व्यक्ति के धर्म करने का लक्ष्य अपनी आत्मा को पाना होता है। मुनिश्री जी ने आगे कहा कि वर्षावास कषाय मुक्ति का, अर्थात् क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी प्रवृत्तियों से मुक्त होने का स्वर्णिम काल है।