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व्यक्तिवाद एवं सुविधावाद को चुनौती देने वाला धर्मसंघ : तेरापंथ
शासनश्री साध्वी सुव्रताजी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में 267वें तेरापंथ स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सीताराम श्यामसुखा द्वारा मंगलाचरण के साथ हुआ। साध्वीश्री सुव्रताजी ने संबोधित करते हुए कहा कि आचार्य भिक्षु ने शुभ मुहूर्त में तेरापंथ धर्मसंघ की स्थापना की थी। आज तेरापंथ धर्मसंघ व्यापक विस्तार का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि तेरापंथ एक नेतृत्व और अनुशासन में रहने वाला, विशुद्ध आचार का पालन करने वाला तथा व्यक्तिवाद एवं सुविधावाद को चुनौती देने वाला धर्मसंघ है। इस संघ में शिक्षा, साहित्य और शोध की त्रिवेणी निरंतर प्रवाहित होती रहती है। संगठन और समर्पण का अद्भुत स्वरूप यहां देखने को मिलता है तथा धर्मक्रांति और धर्मसमन्वय का मंगल दीप निरंतर प्रज्वलित होता रहता है। उन्होंने कहा कि हमें आचार्यश्री महाश्रमणजी जैसे कुशल संचालक एवं संरक्षक प्राप्त हुए हैं, जिनके अनुशासन एवं पावन सान्निध्य में संयम-साधना सतत एवं अनवरत चल रही है। कार्यक्रम में साध्वी सुमनप्रभाजी, साध्वी कार्तिकप्रभाजी एवं साध्वी चिंतनप्रभाजी ने अपने विचार व्यक्त किए तथा गीतिका का संगान किया। अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के शांति जैन, दिल्ली सभा के संगठन मंत्री संजय संचेती, मध्य दिल्ली महिला मंडल की अध्यक्षा कनक चोपड़ा एवं सुरेश जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन विकास बोथरा ने किया।