विविध
जागो बहिनो, लाल प्रभात है
जागो बहिनो, लाल प्रभात है,
चंदेरी की पुण्य धरा पर नया चाँद उदित आया है।
खुशियों का मौसम लाया है,
युवाचार्य के अभिनंदन में हर्ष-सिंधु लहराया है,
खुशियों का मौसम लाया है।
संघ-गगन में चाँद-सूरज की जोड़ी लग रही है प्यारी,
ज्योतिर्मय किरणों से होगी आलोकित धरती सारी।
खिलते-हँसते साथ सितारे, सबका दिल मुस्काया है,
खुशियों का मौसम लाया है।
आचार्य प्रवर श्री महाश्रमण ने अपनी चादर निर्मोही,
प्रज्ञा के धागों से गूँथी, उजली धवल-सी धोली।
ओजस्वी महावीर-सा युग फिर धरती पर आया है,
खुशियों का मौसम लाया है।
इस युग में हम हैं सौभागी, निर्मल-पावन संघ मिला,
एकाचार-विचार-संपदा से तेरापंथ आज खिला।
एक से बढ़कर एक महापुरुषों को हमने पाया है,
खुशियों का मौसम लाया है।
महावीर-सा भाल चमकता, आँखों से अमृतधारा,
चुंबक जैसे आकर्षण से आकर्षित शासन सारा।
सौ-सौ वंदन हैं चरणों में, पावन अवसर आया है,
खुशियों का मौसम लाया है।
सूरज-सम तेजस्वी बनकर चमको, संघ-क्षितिज पर तुम,
ओजस्वी, तेजस्वी बनकर निखरो संघ-धरा पर तुम।
हम किरणें हैं साथ सदा, और महाश्रमण सिर पर साया है,
खुशियों का मौसम लाया है।
लय - जागो बहिनो, लाल प्रभात है