खमा घणी गुरु महाश्रमण दिन्हों भाग्य जगाय

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समणश्रेणी द्वारा प्रस्तुत गीत

खमा घणी गुरु महाश्रमण दिन्हों भाग्य जगाय

मैं धरती फळसूंड री, लागूँ लुळ लुळ पाय।
खमा घणी गुरु महाश्रमण, दिन्हों भाग्य जगाय॥
लाल सूंपियो गुरु चरण, कर दियो लालोलाल।
मैं जननी मुझने करी, गुरुवर मालोमाल॥
सुगुरु री महिमा है भारी, ग्यारमों आसण अवतारी,
म्हारो लाल है लडडू गोपाल, बणायो गुरुवर गिरधारी..
पिछले भव रो कोइ जोगी, कोचर कुल में आयो,
स्वच्छ देह पर सहज जन्म री अशुचि नहीं लायो,
छगनी अंगज साताकारी, सवाईनंदन साताकारी
म्हारो लाल है लडडू गोपाल...
गायो गीत कमाल गंगाणै, पिता पुत्र सागै,
महाप्रज्ञ री नजर पारखी, वैरागी मांगै,
झलक महावीर वीरता री, म्हारो लाल है लडडू गोपाल...
पैलो पाठ विनय रो ले, बचपन में गुणकारी (लियो)
बण्यो घुमक्कड़, फक्कड़, नहिं अक्कड़ री चिणगारी..
रखी शुद्ध संयम इकतारी, म्हारो लाल है लडडू गोपाल...
महाश्रमण रंगरेज रंगी आ सात रंग वाली (चदरिया)
ज्ञान, ध्यान, सम, शम, श्रम, निष्ठा, आज्ञा रखवाली,
बुलंदी कंठकला न्यारी, म्हारो लाल है लडडू गोपाल...
जनम्यों भले झोपड़ी में, नव युग नै जाणनहार (बणो),
खुली दिशावाँ, खुलो आसमां, बढ़ो करो विस्तार,
भिक्षु शासन रो जयकारी, म्हारो लाल है लडडू गोपाल...
आज बधावै संघ समूचो, फिर दुनियां सारी (बधासी),
भिक्षु जन्म दिन युवाचार्य रो चयन चमतकारी,
सुधर्मा सभा चकित सारी,
ओ योगक्षेम कर रह्यो अद्भुत भविष्य री त्यारी...
जैविभा सुंदर सिणगारी, लाडनूं रजधानी प्यारी...
सुगुरु री महिमा है भारी, ग्यारमों आसण अवतारी,
ओ योगक्षेम कर रह्यो अद्भुत भविष्य री त्यारी...
ऐसी चादर बनाई भिक्षु स्याम नै, सारा तेरा ये पंथ अमर हो गया,
महाश्रमण ले आए युवाचार्य को, सारा तेरा ये पंथ मगन हो गया,
सारा तेरा ये पंथ मगन हो गया-2
युवा चादर ओढ़ाई महावीर को,
जयजयकारों से गुंजित गगन हो गया ॥
लय – तावड़ा धीमों पड़ज्या रे