अभातेममं द्वारा आयोजित ‘सेवा साधिका’ प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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लाडनूँ।

अभातेममं द्वारा आयोजित ‘सेवा साधिका’ प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा आचार्यश्री महाश्रमण जी की प्रेरणा से आयोजित पाँच दिवसीय ‘सेवा साधिका श्रेणी प्रशिक्षण शिविर’ का लाडनूँ स्थित जैन विश्व भारती, रोहिणी में सफल एवं प्रेरणाप्रद समापन हुआ।
65 बहनों से प्रारंभ हुई सेवा साधिका श्रेणी की यह प्रेरक पहल सेवा-भाव को व्यवस्थित एवं प्रभावी रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से बहनों को आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ सेवा के विभिन्न व्यावहारिक पक्षों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
गुरुदेव का मंगल सान्निध्य–
शिविर के दौरान परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी ने महती कृपा कर सेवा साधिका बहनों को अपना बहुमूल्य समय प्रदान किया। गुरुदेव ने बहनों को मंगलपाठ सुनाया तथा सेवा साधिका श्रेणी के उद्देश्य एवं महत्व पर मार्गदर्शन देते हुए निष्ठा, समर्पण एवं सेवा-भाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्षा सुमन नाहटा एवं चीफ ट्रस्टी कनक बरमेचा की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
युवाचार्य श्री महावीर मुनि ने बहनों को अपना बहुमूल्य समय प्रदान करते हुए सेवा साधिका के लिए तीन महत्वपूर्ण सूत्र—ज्ञान, विनय और विवेक—बताए। उन्होंने प्रेरणा दी कि सेवा करते समय इन तीनों गुणों को जीवन में उतारने से सेवा कार्य अधिक प्रभावी एवं सार्थक बन सकता है।
साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने लगभग 20 बहनों से व्यक्तिगत संवाद कर उनके प्रशिक्षण अनुभव, विभिन्न परिस्थितियों में प्राप्त सीख तथा सेवा साधिका के रूप में आगे कार्य करने की उनकी दृष्टि जानी।
साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी ने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि सेवा साधिका श्रेणी में पूर्ण समर्पण एवं निष्ठा के साथ कार्य करने से यह श्रेणी आध्यात्मिक दृष्टि से निर्जरा का सुंदर माध्यम बन सकती है तथा संस्था के लिए एक सशक्त एवं उपयोगी सेवा-व्यवस्था के रूप में विकसित हो सकती है।
साध्वीवृंद का प्रेरक मार्गदर्शन–
पाँच दिनों तक साध्वीवृंद के सान्निध्य में विविध ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणाप्रद सत्र आयोजित हुए। इनमें तत्त्वज्ञान, तेरापंथ धर्मसंघ एवं जैन परंपरा का इतिहास, साध्वी प्रमुखाओं के जीवन एवं व्यक्तित्व, प्रेक्षा ध्यान, योग, नवकार मंत्र, कायोत्सर्ग, मंत्र साधना एवं व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों को शामिल किया गया।
साध्वी डॉ. लावण्ययशा जी, साध्वी डॉ. सुमंगलप्रभा जी, साध्वी मध्यरेखा जी एवं साध्वी मयंकप्रभा जी ने विभिन्न विषयों पर बहनों का मार्गदर्शन किया तथा प्रशिक्षण को आध्यात्मिक एवं ज्ञानवर्धक आयाम प्रदान किया।
सेवा का व्यावहारिक प्रशिक्षण–
राष्ट्रीय संयोजिका अर्चना भंडारी ने संस्थागत कार्यप्रणाली, संस्था की रीति-नीति, सेवा व्यवस्था, रास्ते की सेवा एवं गोचरी सेवा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
सह-संयोजिकाएँ पूजा सिंघवी, सारिका बागरेचा एवं शालिनी लुंकड़ ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अलग-अलग परिस्थितियों में सेवा साधिका के दायित्व एवं सेवा-भाव को सहज एवं रोचक ढंग से समझाया। अभातेममं कार्यसमिति सदस्य राखी बैद एवं सज्जन पारेख का शिविर की व्यवस्थाओं एवं सफल आयोजन में विशेष सहयोग रहा।
यह शिविर केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा को साधना, ज्ञान को आचरण और जीवन को संस्कारों से जोड़ने वाली एक प्रेरक यात्रा सिद्ध हुआ।