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मासखमण तप अभिनंदन समारोह का आयोजन
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में उत्तर हावड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा योगक्षेम विहार में मासखमण तप अभिनंदन समारोह का आयोजन योगक्षेम सभागार में किया गया। मासखमण तपस्विनी रूपा सुरेश बैद (बाली) से थी। इस अवसर पर अच्छी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा— जिनशासन में तप का बहुत बड़ा महत्त्व है। तप से कर्मों की निर्जरा होती है। तप से पूर्व-अर्जित कर्मों का क्षय होता है। तप से शारीरिक मानसिक भावनात्मक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। तप से काया कुंदन होती है। तप का अर्थ है— इच्छा का निरोध। भीतर से जो मांग उठती है उसको अस्वीकार करना ही तप है। तप मुक्ति का उपाय है। तप करना, करवाना व अनुमोदन करना धर्म ही है। शरीर को देखकर तपस्या करनी चाहिए। तपस्या में प्रदर्शन नहीं निदर्शन होना चाहिए। मुनि ने आगे कहा— जिसके अन्तराय कर्म का क्षयोपशम होता है वही तपस्या कर सकता है। बहिन रूपा देवी बैद ने हिम्मत करके मासखमण की तपस्या की है यह अपने आप में विशिष्ट है। तपस्वी बहिन के प्रति आध्यात्मिक शुभकामना। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि कुणाल कुमार जी के मंगल संगान से हुआ। साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी के संदेश का वाचन तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा सुजाता दुगड़ ने किया। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन सभा मंत्री विनीत कोठारी ने व कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया।