शम, सम और श्रम के त्रिवेणी संगम हैं युवाचार्यश्री महावीर

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सिंकदराबाद।

शम, सम और श्रम के त्रिवेणी संगम हैं युवाचार्यश्री महावीर

मुनि दीप कुमारजी ने कहा कि 'युवाचार्यश्री महावीर शम, सम और श्रम के त्रिवेणी संगम हैं।' उन्होंने उपशम की गहन साधना की है, समता उनके जीवन का अभिन्न गुण है तथा वे श्रम और पुरुषार्थ के कठोर साधक हैं। उनके व्यक्तित्व में शील और श्रुत का मणिकांचन संयोग विद्यमान है। वे जितने श्रेष्ठ श्रुताराधक हैं, उतने ही उत्कृष्ट मुमुक्षु भी हैं। मुनिश्री ने आगे कहा कि युवाचार्यश्री की वाणी ओजस्वी, प्रेरणाप्रद एवं मधुर है। उनके आचरण में वैराग्य की गहराई और संयम की मधुरता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी वे समता बनाए रखते हैं। उनके शांत, प्रसन्न और सदैव मुस्कुराते व्यक्तित्व से प्रत्येक साधक प्रेरणा ग्रहण कर सकता है। उन्होंने कहा कि युवाचार्यश्री की विनम्रता, समर्पण भावना और गुरु-निष्ठा ने युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी का हृदय जीत लिया है। आचार्यप्रवर द्वारा उन्हें युवाचार्य पद पर मनोनीत किया जाना धर्मसंघ के उज्ज्वल भविष्य का आश्वासन है। आचार्य–युवाचार्य की गौरवशाली जोड़ी दीर्घकाल तक धर्मसंघ का सफल नेतृत्व करती रहे। इस अवसर पर मुनिश्री काव्य कुमारजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ एक गुरु, एक अनुशासन और एक आज्ञा की परम्परा में निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। तेरापंथी सभा सिंकदराबाद अध्यक्ष सुशील संचेती, TYP अध्यक्ष विनोद दुगड़, TPF के अध्यक्ष वीरेन्द्र घोषल, तेममं अध्यक्षा नमिता सिंघी,अणुव्रत समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र बोथरा आदि ने विचार व्यक्त किए।