सहजता में झलकती साधना : युवाचार्य श्री महावीर`

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पीतमपुरा, दिल्ली।

सहजता में झलकती साधना : युवाचार्य श्री महावीर`

चातुर्मासरत बहुश्रुत मुनि उदितकुमारजी के सान्निध्य में आयोजित युवाचार्य श्री महावीर अभिवंदना समारोह भव्यता एवं उल्लासमय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए बहुश्रुत मुनि उदितकुमारजी ने कहा-'सच्ची साधना का सबसे उज्ज्वल स्वरूप व्यक्ति की सहजता, सरलता और विनम्रता में प्रकट होता है।
युवाचार्य श्री महावीर के व्यक्तित्व में दिखाई देने वाली यह अथाह सरलता उनकी उत्कृष्ट साधना और गहन आत्मानुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।मुनि महावीर से मुख्यमुनि और अब युवाचार्य के रूप में उन्हें जो उत्तरदायित्व प्राप्त हुआ है, वह केवल एक पद की प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि पूर्वाचार्यों द्वारा निर्मित महान आदर्शों, मर्यादाओं एवं तेरापंथ धर्मसंघ की गौरवशाली परंपरा के संरक्षण का विराट दायित्व है। उन्होंने आगे कहा -'तेरापंथ धर्मसंघ की यह विशिष्ट परंपरा रही है कि इस सर्वोच्च उत्तरदायित्व तक वही साधक पहुँचता है, जो अपनी साधना, समर्पण, क्षमता और गुरु-कृपा से स्वयं को सिद्ध कर चुका होता है। युवाचार्य श्री महावीर अपने सक्षम एवं सबल कंधों पर पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से सिंचित धर्मसंघ की इस महान परंपरा का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए अपने तेजस्वी आभामंडल से धर्मसंघ को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे। समारोह के दौरान समाज की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए युवाचार्य श्री महावीर के प्रति श्रद्धा एवं उनकी अभिवंदना में अपने भाव अर्पित किए। मुख्य अभिवंदना समारोह के साथ-साथ अनेक प्रेरणादायी कार्यक्रम भी गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। तेरापंथ युवक परिषद, दिल्ली द्वारा आयोजित मंत्र दीक्षा समारोह में नौ वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके बच्चों को नवकार महामंत्र की पावन दीक्षा प्रदान की गई तथा उनके संस्कारमय जीवन के लिए जीवन-मूल्यों के प्रत्याख्यान भी कराए गए।