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कहानी प्रेरणा, प्रोत्साहन व पुरुषार्थ की
इस धरा पर कई व्यक्ति महानता लिए ही अवतरित होते हैं और कई अपने पुरुषार्थ से महानता की ओर अग्रसर होते हैं। ऐसी ही कहानी है, हमारे नव मनोनीत युवाचार्य श्री महावीर की जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से यह साबित कर दिया कि जब व्यक्ति साधना की असीम ऊंचाइयां को छूता है और जब एक साधक अपने गुरु के प्रति सर्वांगीण समर्पित हो जाता है कि वहां से प्रगति के नए द्वार स्वतः ही खुलना प्रारंभ हो जाते हैं।
इस कहानी में पुरुषार्थ और समर्पण की गाथा तो है लेकिन साथ ही साथ गुरु का प्रोत्साहन, गुरु की प्रेरणा, गुरु का वात्सल्य जिस मनुष्य पर हो जाता है वह उत्तरोत्तर प्रगति करता रहता है।
यहां पर एक विशेष बात यह भी है की जिस व्यक्ति को महान बनना होता है, जरूरी नहीं कि वह एक ऐसे साधनों से संभ्रांत परिवार में पैदा हो, जहां से प्रगति स्वयं सिद्ध होने लगे। यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं है, एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे इस बालक ने यह साबित कर दिया कि जब लगन, समर्पण, बुद्धि का सम्यक उपयोग और निष्ठा का समुच्चय हो जाए तो वे सब साधारण बातें कोई मायने नहीं रखती।
यहां एक बात यह भी महत्वपूर्ण है कि जब हम लोकतंत्र की बात करते हैं तो ऐसा कह सकते हैं की एक चाय वाला इस देश की बागडोर संभाल सकता है, प्रधानमंत्री बन सकता है। साधारण से साधारण व्यक्ति राष्ट्रपति बन सकता है। ऐसा ही कुछ तेरापंथ धर्म संघ में भी देखने को मिला है जहां पर योग्यता को महानता प्राप्त करने का अवसर मिला है। रेगिस्तान (फलसुण्ड) की मिट्टी चंदन तिलक बन कर संघ के भाल पर शोभायमान हो रही है। यूं तो संघ में अनेक साधु साध्वियों में विशेष योग्यताएं हैं लेकिन आचार्य के मन में, आचार्य के हृदय में जो व्यक्ति एक विशेष स्थान बना लेता है वही सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है।
हमने देखा है युवाचार्य महावीर को एक बाल मुनि के रूप में भी जहां वे अपनी सजगता, विनम्रता और विधेयात्मक कुशाग्र बुद्धि से गुरुओं के मन में स्थान बनाते चले गए। तेरापंथ के गुरु महान होते हैं और जब उनके मन में उत्तराधिकार के चयन का प्रश्न आता है तो वह बहुत सारे गुणों को दृष्टिगत रखते हैं और सर्वोच्च गुण धारक को इस पद के लिए मनोनीत करते हैं। आचार्य महाश्रमण जी ने भी इनमें वे तमाम गुण देखे हैं, जिससे आज वे संघ में एक चमकते हुए सितारे के रूप में हम सबको आलोकित व आशान्वित कर रहे हैं।
चूंकि युवाचार्य महावीर स्वयं एक युवा भी है तो वर्तमान युग के गम्भीर प्रश्न है, युवाओं के बारे में, जेन जी के बारे में, उनका निदान करते हुए निश्चित रूप से वे अपनी दीर्घदृष्टि से युवाओं में एक ऐसा जोश भरेंगे, ऐसी भावना जगाएंगे जहां पर तेरापंथ धर्म संघ के युवा धार्मिक, सामाजिक और मानवीय अभिगम में तेजी से आगे की ओर बढ़ेंगे। हम तो उस दिन का, उस पल का इंतजार कर रहे हैं जहां पर तेरापंथ के युवा आपकी दृष्टि में खरे उतरते हुए जग इतिहास में एक ऐसा पृष्ठ जोड़ देंगे जो हमेशा-हमेशा के लिए तेरापंथ धर्म संघ को पूरे विश्व पटल पर अग्रिम स्थान बनाए रखने में सहायक होगा।
तेरापंथ धर्म संघ के प्रबल प्रतापी आचार्य की अवदानों से पूरा विश्व लाभान्वित हुआ है और यह परंपरा आगे अनवरत रूप से चलती रहेगी, बढ़ती रहेगी। आज जो विश्व की ज्वलंत समस्याएं हैं उनके समाधान में भी तेरापंथ का नेतृत्व समाधान दायक के रूप में पूरे संसार में प्रस्तुत हो सकेंगे। आचार्य श्री महाश्रमण जी के निर्देशन में युवाचार्य श्री महावीर जी से भी युग को, मानवता को बहुत अपेक्षाएं हैं। आपके चयन के प्रति बहुत-बहुत शुभासंशाएँ और मंगल कामना भी कि आप तेरापंथ के इतिहास में युवाचार्य के रूप में सर्वाधिक रहने का रिकॉर्ड स्थापित करें।