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युवाचार्य प्रवर - गुरु-भक्ति व विनम्रता की 'साक्षात मूर्ति'
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि मोहजीत कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में नवमनोनीत युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी का वर्धापना समारोह श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, कटक के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुनि मोहजीत कुमार जी ने कहा पूज्य प्रवर नेआचार्य श्री भिक्षु के 301वें जन्मदिवस की मंगल बेला में चतुर्विध धर्मसंघ की साक्षी में मुख्यमुनिश्री महावीर कुमार जी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में युवाचार्य पद पर मनोनीत कर धर्मसंघ को समर्थ नेतृत्व प्रदान किया है। मुनिश्री ने युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु के प्रति उनकी अटूट निष्ठा, विनम्रता, समर्पण, प्रमोदभाव तथा सेवाभाव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि युवाचार्य श्री निरामय, स्वस्थ एवं दीर्घायु रहते हुए अपने गुणों का निरंतर विकास करें तथा धर्मसंघ की प्रभावी सेवा करते रहें। इस अवसर पर उन्होंने अपने स्वरचित दोहों का भी प्रभावशाली पाठ किया। मुनिश्री भव्य कुमार जी ने कहा कि फलसूंड जैसे छोटे से गाँव से प्रारंभ हुई यह साधना-यात्रा आज गुरु-समर्पण, सहजता, सरलता, विनम्रता एवं उत्कृष्ट गुणों से सुशोभित होकर युवाचार्य पद तक पहुँची है। मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं। मुनि जयेशकुमार जी ने युवाचार्य प्रवर से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनकी गुणाराधना की। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निवर्तमान अध्यक्ष मनसुखलाल सेठिया, कटक सभा अध्यक्ष मुकेश सेठिया, भवन समिति अध्यक्ष चैनरूप चौरड़िया, आदि उपस्थित रहे। संचालन मुनि भव्य कुमार जी ने किया।