सिवांची मालाणी: प्रांगण में रच गया मंगलकारी स्वास्तिक

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उधना।

सिवांची मालाणी: प्रांगण में रच गया मंगलकारी स्वास्तिक

आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या डॉ. साध्वी परमयशा जी के सान्निध्य में 'युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी का वर्धापना समारोह' के कार्यक्रम का समायोजन हुआ। डॉ. साध्वी परमयशा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि—आचार्य प्रवर ने सिवांची मालाणी की वसुंधरा को चकित-विस्मित कर दिया। जब इस नीलांबर के सुकुमार युवा संत प्रथम युवाचार्य बने, यह धरा गर्व और गौरव से धन्य-धन्य हो गई, जिसके एक वीर सपूत तेरापंथ की ख्यात में विख्यात हो गए। जिन्होंने सिवांची मालाणी के प्रांगण में स्वास्तिक रच दिए। मुख्यमुनि को युवाचार्य बना आचार्य प्रवर ने भिक्षु बोधि-दिवस का पुनर्जन्म कर दिया। सैकड़ों स्त्रियां सैकड़ों पुत्रों को जन्म देती हैं, पर फलसूंड के एक माता-पिता ने ऐसा क्या संकल्प किया, ऐसा क्या मंत्र पढ़ा, क्या ग्रंथ पढ़ा जिसकी वजह से उनके आंगन में एक कल्पवृक्ष तुल्य बाल-गोपाल का जन्म हुआ। युवराज के प्रति जितना लिखें उतना कम है। चिरायु शतायु हों। तेरापंथ सभा द्वारा वर्धापना समारोह का मंगलाचरण किया गया। तेरापंथ सभा, महिला मंडल, युवक परिषद, ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाएं, कन्या मंडल आदि सभी ने सामूहिक रूप से शब्द और चित्र के माध्यम से अपने भावों की अभिव्यक्ति नवम युवराज के प्रति व्यक्त की। डॉ. साध्वी परमयशा जी, साध्वी विनम्रयशा जी, साध्वी मुक्ताप्रभा जी और साध्वी कुमुदप्रभा जी ने 'मनोनयन दिन, बने प्रवर जिन, महाश्रमण दरबार' गीत का सुंदर संगान किया तथा 'समर्पण, आगमधर, शिष्य हो कैसा? युवाचार्य महावीर जैसा' इस पर एक सुंदर प्रस्तुति प्रस्तुत की। साध्वी मुक्ताप्रभा जी और विनम्रयशा जी ने कविता के माध्यम से अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल द्वारा 'इक्कीसवीं सदी के नवम् युवराज' के प्रति एक सुंदर 'The Wonderful Digital Program' प्रस्तुत किया गया। उपासक श्रीमान् जवेरीमलजी दुगड़ ने भी अपने भावों की प्रस्तुति दी॥ श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के राष्ट्रीय उपसभा प्रभारी लक्ष्मीलाल बाफना ने नवम युवाचार्य के प्रति अपने भावों की अभिव्यक्ति दी। संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री पुखराज हिरण ने किया।