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श्रद्धेय युवाचार्य श्री महावीरकुमारजी का गौतम ज्ञानशाला में प्रथम पदार्पण
श्रद्धेय युवाचार्य श्री महावीरकुमारजी का गौतम ज्ञानशाला में प्रथम पदार्पण समण श्रेणी के लिए अत्यंत आल्हादकारी था। सर्वप्रथम समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञाजी ने युवाचार्यवर का अभिनंदन करते हुए कहा— 'गौतम ज्ञानशाला समण श्रेणी का मुख्य प्रकल्प स्थल है। यह गौतम स्वामी के नाम से जुड़ा हुआ है। गौतम स्वामी का नाम ऋद्धि-सिद्धि का दाता है। आपका शुभागमन हमारे लिए हर दृष्टि से सुख की सृष्टि करने वाला बने।'
तदनंतर समणीवृंद ने सुमधुर गीत से आराध्य का स्वागत किया। युवाचार्यवर का संबंध कवास की पावन धरा से है, अतः सिवाणची-मालानी की समणीजी ने भी अपने स्वरों की प्रस्तुति दी। साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशाजी (जो पिछले दस वर्षों से समण श्रेणी का आध्यात्मिक निर्देशन कर रही हैं) ने कहा— 'समण श्रेणी आचार्यश्री तुलसी के उर्वर चिंतन की निष्पत्ति है। इसकी उपयोगिता निर्विवाद है। समण श्रेणी तुलसी-महाप्रज्ञ की मानसपुत्री है।'
श्रद्धेय युवाचार्यवर ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा— 'समण श्रेणी पिछले साढ़े चार दशकों से धर्मसंघ की सेवा कर रही है। जैन विश्व भारती संस्थान में अध्यापन कार्य, निदेशों में, साध्वियों की समाचारी में सेवा आदि अनेक क्षेत्रों में यह श्रेणी कार्यरत है। तीन-तीन युगप्रधान आचार्यों का संरक्षण, वात्सल्य व प्रेरणाएँ इस श्रेणी को प्राप्त हुई हैं और आज भी हो रही हैं। आचार्यश्री महाश्रमणजी के नेतृत्व में इस श्रेणी में संयम, तप, त्याग व पवित्रता की वृद्धि हो।' युवाचार्यवर ने समणीजी के प्रत्येक व्यक्तिगत कक्ष में अपने पावन चरण धरे। अतः सभी समणीजी को अपने-अपने कक्ष में युवाचार्यवर को मंगल कामनाएँ देने का अलभ्य अवसर प्राप्त हुआ। श्रद्धेय युवाचार्यप्रवर का गौतम ज्ञानशाला में करीब 1 घंटा 15 मिनट का प्रवास समण श्रेणी के लिए अविस्मरणीय एवं यादगार बना रहेगा। अंत में समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने समण श्रेणी की तरफ से कृतज्ञता ज्ञापित की।