शासनश्री सति सुप्रभा  सौभाग्य सरावां

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साध्वी संघप्रभा

शासनश्री सति सुप्रभा सौभाग्य सरावां

म्हे तो गौरव गांवां जी क... म्हे तो...
शासन श्री सति सुप्रभा सौभाग्य सरावां जी
डूंगरगढ़ में जनम्या, सतिवर चातुरगढ़ में दीक्षा।
श्री तुलसी कर दो हजार चौदह में संयम शिक्षा ॥ १ ॥
भैषव शासन में थे सतिवर जबरो नाम कमायो।
सति बालू मालू री सेवा, शासन सुयश बढ़ायो ॥ २ ॥
गुरुवर महाप्रज्ञ री अन्तर मन स्यै सेवा साझी।
महाश्रमण युग योगक्षेम में जीती अन्तिम बाजी ॥ ३ ॥
शासनमाता कनकप्रभा री कृपा सवाई पाई।
साध्वी प्रमखा विश्रुत विभा स्नेह दृष्टि बरसाई ॥ ४ ॥
मनहारी बा मूरत प्यारी कदे न भूली जावे।
मधुरी मधुरी बातां थारी स्मृतियां में अब आवे ॥ ५ ॥
तन स्यूँ हलका, मन स्यूँ हलका, शान्त स्वभावी धीरा।
थारै सरणा सतियां भैषव गण री भव्य नजीरा ॥ ६ ॥
लियो भार थे पार पुगायो, जीवन धन्य बनायो।
सुद नवमी आषाढ़ वार बुध, सुरपुर पथ अपनायो ॥ ७ ॥
सक्रिय स्वस्थ स्वावलम्बी थे जागृत जीवन जीयो।
सुदृढ़ व्यवस्थित जीवन शैली, शान्त सुधा रस पियो ॥ ८ ॥
भाग्यवान अति पुण्यवान थे, गुरु दिल स्थान बनायो।
'संघप्रभा' म्हे भी सौभागी, दुर्लभ अवसर पायो ॥ ९ ॥
तर्ज - बाबा बेगपधारो जी