युवाचार्यवर निरामय एवं चिरायु बनें

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कांदिवली, मुंबई।

युवाचार्यवर निरामय एवं चिरायु बनें

शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या शासनश्री साध्वी विद्यावतीजी 'द्वितीय' के सान्निध्य में आचार्य श्री महाश्रमणजी द्वारा नव मनोनीत युवाचार्य श्री डा. महावीर कुमारजी का वर्धापना समारोह भव्य रूप में आयोजित किया गया । स्वागत भाषण श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउण्डेशन मंत्री जगदीश परमार व तेरापंथी सभा अध्यक्ष मीठालाल धाकड़ ने दिया। साध्वी विद्यावतीजी ने कहा-तेरापंथ के आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु से लेकर यानी लगभग 265 वर्षों से तेरापंथ में एक आचार्य के नेतृत्व की स्वस्थ परंपरा चल रही है। वर्तमान आचार्य ही अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करते हैं। कोई भी साधु पद के लिए उम्मीदवार नहीं बनता। वर्धापना समारोह में मैं मंगलकामना करती हूँ कि युवाचार्यवर निरामय एवं चिरायु बनें। साध्वी प्रियंवदाजी ने संयोजकीय वक्तव्य में कहा-युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी में ऋजुता, मृदुता, विनम्रता, विद्वत्ता आदि गुणों का समावेश है। युवाचार्य के हृदय में गुरु के प्रति जो समर्पण भाव है वह सबके लिए अनुकरणीय है। दीक्षित होने के बाद उन्होंने शिक्षा, संयम एवं साधना के द्वारा प्रगति की ऊंचाइयों का स्पर्श किया है। साध्वी प्रेरणाश्रीजी ने भावपूर्ण कविता, साध्वी मृदुयशाजी ने एवं साध्वी ऋद्धियशाजी ने वक्तव्य के माध्यम से युवाचार्यश्री की वर्धापना की। श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउण्डेशन अध्यक्ष मेघराज धाकड़ ने युवाचार्य डॉ महावीर कुमार जी के प्रति मंगल भावनाएं व्यक्त की। भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष ख्यालीलाल तांतेड ने आचार्य महाश्रमण जी द्वारा मुख्य मुनि महावीर कुमार जी को युवाचार्य मनोनीत किए जाने पर भारत जैन महामंडल की और से शुभकामनाएं प्रेषित की। तेरापंथी सभा मुंबई अध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी ने कहा युवाचार्य महावीर कुमार जी सरल सहिष्णु और विनम्र भाव का व्यक्तित्व है हम युवाचार्य के प्रति श्रद्धा भाव से आपके आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना करते हैं।