रचनाएं
स्वर्णिम इतिहास रचाया
स्वर्णिम इतिहास रचाया - 2
तेरापंथ की राजधानी में, रंग-सुरंगा छाया ॥
गुरुतुलसी की जन्मभूमि, चंदेरी प्यारी-प्यारी,
योगक्षेम वर्ष शुभ अवसर, चारतीर्थ मनहारी - 2
सृजनदेव ने अपनी कृति को, युवराजा बनाया ॥
गणवन खुशियों में न्हाया - 2 ॥
आर्य महाप्रज्ञ जी से, अनमोला संयम पाया,
बढ़ो निरन्तर तुम आगे, अवसर भरपूर दिराया - 2
विनय-समर्पण-श्रमनिष्ठा ने, शिखरों तुम्हें चढ़ाया ॥
गणवन खुशियों में न्हाया - 2॥
गायन का अंदाज निराला, सुन्दर प्रवचन शैली,
श्रेष्ठ श्रुताराधक श्रुत का, आराधन करते डेली - 2
अलबेली गणभक्ति-गुरुभक्ति से सज्जित काया ॥
गणवन खुशियों में न्हाया - 2 ॥
महावीर के परम भक्त को, महावीर मनभाया,
आओ मुनि महावीर' घोष सुन, धरा-गगन हरसाया - 2
हाथ पकड़ नेमासुत ने, निज पट पर तुम्हें बिठाया ॥
गणवन खुशियों में न्हाया - 2 ॥
भूल नहीं पायेंगे जिसने, देखा भव्य नजारा,
अमर रहे यह जोड़ी युग-युग, डाल रहे थुथकारा - 2
'जय-जय नंदा - जय-जय भद्या' गीत यशोमय गाया ॥
गणवन खुशियों में न्हाया - 2 ॥
गण को निश्चित बनाया - 2 ॥
तर्ज – जहां डाल-डाल पर...