वर्धापन का पावन अवसर, महके मानस मधुवन

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साध्वी योगक्षेमप्रभा

वर्धापन का पावन अवसर, महके मानस मधुवन

​युवराजप्रवर अभिनंदन,
वर्धापन का पावन अवसर, महके मानस मधुवन।
​आषाढ़ी तेरस उजियाली, नव इतिहास बनाया,
महासूर्य ने बालसूर्य का वर अभिषेक कराया।
देख नजारा जैविभा का, प्रमुदित गण नंदनवन॥
​श्री सवाई जी कोचर ने रत्न दिया अनमोला,
महाप्रज्ञ का वरद हस्त पा निखरा रूप सतोला। (2)
योग्य शिष्य को पाकर निश्चिंत, देखो नेमानंदन॥
देख रहे इस कलियुग में श्री शासन की पुण्याई,
एक-एक से बढ़कर आचार्यों की छटा सवाई। (2)
महाश्रमण युग हमें दिखाए दुर्लभ दृश्य विलक्षण॥
ओ महावीर! गुरुवर से अनुपम आशिष तुम पाओ,
दीर्घकाल तक युवाचार्य का कीर्तिमान बनाओ। (2)
जुगल जोड़ी यह अमर रहे करने युग का पथदर्शन॥
तर्ज – यह भारत देश है...