कोहिनूर को पाकर सम्पूर्ण धर्म संघ निहाल हो गया

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गंगाशहर।

कोहिनूर को पाकर सम्पूर्ण धर्म संघ निहाल हो गया

तेरापंथ भवन में साध्वी त्रिशलाकुमारी जी के सान्निध्य में नवमनोनीत युवाचार्य महावीर मुनि के वर्धापना का कार्यक्रम आयोजित किया गया। साध्वी त्रिशलाकुमारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा-जिस शिष्य के सिर पर गुरू का वरद्हस्त होता है वो शिष्य कंकर से शंकर, बिन्दू से सिंधु और भक्त से भगवान बन जाता है। मुनि महावीर को भी आचार्य महाप्रज्ञ व आचार्य महाश्रमण जी जैसे महान गुरूओं का वरद्हस्त प्राप्त हुआ आचार्यद्वय ने अपनी कुशल छेनी से तराशा, सजाया, संवारा और संघ का सरताज बना दिया। ऐसे कोहिनूर को पाकर सम्पूर्ण धर्म संघ निहाल हो गया। भगवान महावीर की पट्टधर परम्परा के भावी उत्तराधिकारी युवाचार्य महावीर अनेक विशेषताओं के पुंज है। आपश्री मधुर भाषी है। विनय और विवेक की नजीर है। आपका आत्मानुशासन बेजोड़ है। इन्द्रिय संयम अनुत्तर है। आपश्री श्रेष्ठ श्रुत आराधक है। आप ओजस्वी वक्ता व मधुर संगायक है। आपश्री मधुर कंठो से गाते है तो पूरी परिषद् संमोहित हो जाती है। साध्वी दीपमाला जी ने मुक्तक के माध्यम से अपने आराध्य का वर्धापन किया। साध्वी कल्पयशा जी ने कहा आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी का दिन वैसे ही तेरांपथ धर्मसंघ का ऐतिहासिक दिन है। आचार्य श्री महाश्रमण जी ने अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति कर इस दिन को ओर ऐतिहासिक बना दिया। जिस क्षण आचार्य श्री ने ये घोषणा कि की मैं अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति करना चाहता हूँ, लाखों आंखे आचार्य प्रवर को अपलक निहार रही थी लाखों कान उस नाम को सुनने के लिए लालायित हो रहे थे कौन संघ का सरताज बनेगा। महिला मण्डल की अध्यक्षा प्रेम बोथरा, शान्ति प्रतिष्ठान की और से धर्मेन्द्र डाकलिया ने युवाचार्य प्रवर की वर्धापित किया। कन्यामण्डल की संयोजिका गरिमा भंसाली ने स्वरचित कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम का कुशल संयोजन साध्वी कल्पयशा जी ने किया।