रचनाएं
युवाचार्य प्रवर अलौकिक कमल में प्रकट हुए ब्रह्मा
संघ सुमेरु की स्थिरता, तुम्हें शत-शत वंदन।
संघ समुद्र की विशालता, तुम्हें शत-शत वंदन।
संघ नगर के प्रहरी, तुम्हें शत-शत वंदन।
संघ चक्र की अभेद्य धुरी, तुम्हें शत-शत वंदन॥
संघ सारथि
गुरुदेव श्री! आपने संघ रथ की गतिशीलता को निर्बाध आगे-से-आगे बढ़ाने और संघ के उज्ज्वल भविष्य के लिए नवम-युवाचार्य श्री का मनोनयन कर धर्मसंघ को बेहद खुशियाँ दी हैं, जो बे-अंदाज हैं। पौराणिक कथन है कि विष्णु की नाभि से एक अलौकिक कमल पैदा हुआ जिसमें ब्रह्मा प्रकट हुए। मुझे ऐसा लगता है कि असम की धरा में गुरुदेव श्री के चिन्तन रूपी नाभि से मुख्यमुनि पद रूपी अलौकिक कमल की सर्जना हुई। लाडनूँ में मुख्यमुनि पद के अलौकिक कमल में नवम-युवाचार्य के रूप में ब्रह्मा प्रकट हो गए हैं, जो तेरापंथ के भाग्य विधाता होंगे। प्रभो श्री! आपश्री की युगल शासना-अनुशासना और युगल नेतृत्व शिवत्व को उजागर करता हुआ हमें शिवपथ पर निर्बाध आगे बढ़ाएगा। गुरुदेव श्री के चिन्तन, निर्णय, व क्रियान्वयन का अभिनन्दन, युवाचार्यप्रवर का अभिनन्दन करते हुए—
संघ सूर्य के पावन प्रकाश का, तुम्हारी कृति का अभिनन्दन।
संघ शशि के उज्ज्वल उजास का, तुम्हारी कृति का अभिनन्दन।
संघ के अमल अहसास का, तुम्हारी कृति का अभिनन्दन।
संघ के विमल विश्वास का, तुम्हारी कृति का अभिनन्दन॥