होनहार महावीर है,  विनय विवेक प्रवीण

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साध्वी राकेश कुमारी, बायतू

होनहार महावीर है, विनय विवेक प्रवीण

(बीदासर में गुरुदेव के समक्ष गाई गई)
'होनहार महावीर है, विनय विवेक प्रवीण
कुल का नाम रोशन करेगा, वैराग्यभाव में लीन॥'
अन्नदाता म्हारा! म्हानैं स्यूं भूल्या थे
फलसुंड नगरी जोवै थारी बाट, पधारो म्हारै, म्हानें क्यूं भूल्या थे
मरुधर पधारो गण सम्राट, पधारो म्हारै, म्हानें--
इतिहास बनाओ गण सम्राट, पधारो म्हारै, म्हानें--
अर्जी स्वीकारो गण सम्राट, पधारो म्हारै, म्हानें---॥
गांव निवासी ऊभा ऊभा कागलिया उड़ावै,
मोर पपैया पानी बिन मछली ज्यूं तरसावै
पल पल बाट निहारै थारी, चालो गण सम्राट, अन्नदाता-- म्हानैं -
महाश्रमण महाश्रमणी साथे साज बाज है पूरो
माटी बणाज्या चन्दन फरस्यां आशा म्हारी पूरो
अब क्यूं तरसावो थांस्यूं, शोभित दशमो पाट, अन्नदाता--- म्हानें--
महर कराई म्हारे ऊपर चौमासो बकसायो
त्याग तपस्या ज्ञान ध्यान स्यूं उपवन वो सरसायो
अमृत वाणी स्यूं सींच्या अब बणज्या गंगा रो घाट, अन्नदाता---
महावीर है चरणा हाजिर मर्जी आप कराओ
प्रतिक्रमण रो हुक्म दिराकर नव इतिहास बनाओ
थे ही घनश्याम म्हारा मिटज्या मन गहघाट - अन्नदाता म्हारा--
तर्ज – सावण उनायो रे...