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युवाचार्य प्रवर आरती
श्री युवाचार्य महावीर
मनोनयन कर गुरु ने - २
खोली गण तकदीर॥ध्रुप॥
तात सवाई माता छगनी के जाये
कोचर कुल उजियारे, फैला सुयश समीर॥ १॥
महाप्रज्ञ मुख दीक्षा, जसवल में पाई
समिति गुप्ति में तत्पर, अच्छी बनी नजीर ॥२॥
महाश्रमण गुरुवर की, महर हुई भारी
धर्म संघ को उपहृत , निर्मल तम तस्वीर ॥३॥
डाक्टर सरल नम्र हैं, आगम के ज्ञाता
श्रेष्ठ श्रुताराधक है, धीर वीर गम्भीर ॥४॥
भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी, बोधिदिवस आया
आसाढ़ी तेरस दिन, मिले भाग्य से पीर ॥ ५॥
वर्धापन अवसर पर, शत-शत अभिनन्दन
करें कामना प्रतिपल, स्वस्थ रहे शरीर ॥ ६॥
तर्ज – आरती