भगवान महावीर की वाणी को आत्मसात करता हुआ निरन्तर गतिमान है तेरापंथ

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उत्तर-मध्य, दिल्ली।

भगवान महावीर की वाणी को आत्मसात करता हुआ निरन्तर गतिमान है तेरापंथ

साध्वी कुन्दनरेखाजी के सानिध्य एवं तेरापंथ सभा, उत्तर-मध्य दिल्ली के तत्वावधान में त्रिदिवसीय आध्यात्मिक मंगलमय कार्यक्रम मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी कुन्दनरेखाजी ने कहा - तेरापंथ धर्म संघ प्राणवान धर्म संघ है। तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य प्रणेता आचार्य भिक्षु ने मर्यादा और अनुशासन की विरल धाराओं से उसकी शक्ति को शतगुणित किया। उत्तरवर्ती परम्परा में सभी आचार्यों ने इसे निरन्तर बल दिया। वर्तमान आचार्य श्री महाश्रमण ने इस संघ को शिखरों पर चढ़ाया है और चढ़ा रहे हैं।
त्रिजन्मशताब्दी की सम्पन्नता के पुनीत अवसर पर यही मंगलकामना है कि यह संघ निरन्तर आध्यात्मिक ऊँचाइयों का स्पर्श करता रहे। एकसूत्रीय अनुशासन में आचार-विचार को सुदृढ़ता के साथ पालन करें तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। चातुर्मासिक चतुर्दशी का यह पावन दिन अध्यात्म की गंगा में प्रवाहित होकर निर्मल होने का है, क्योंकि चार महीनों तक अब स्थिर रहकर चतुर्विध धर्मसंघ प्रगति के सोपान पर चढ़े। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की आराधना कर सघन निर्जरा करें।
तेरापंथ स्थापना दिवस - यह शासन का जन्म दिन है। आचार्य भिक्षु ने इसकी नींव लगाई है। 250 वर्षों में अनेक उतार-चढ़ावों के बीच यह संघ हिला नहीं, रुका नहीं, बल्कि भगवान महावीर की वाणी को आत्मसात करता हुआ निरन्तर गतिमान रहा।
साध्वी सौभाग्ययशाजी ने कहा - आचार्य भिक्षु अलबेले थे। वे कभी भी घबराये नहीं। कष्टों की आंधी ने उन्हें उड़ाना चाहा, विरोध के बादलों ने उन्हें डराना चाहा, लेकिन वे मानवता के मसीहा अपने उसूलों पर डटे रहे। त्रिजन्मशताब्दी का यह पावन अवसर, चातुर्मासिक चतुर्दशी, प्रतिक्रमण एवं तेरापंथ स्थापना दिवस - एक साथ तीन-तीन भव्य कार्यक्रम, सभी में आचार्य भिक्षु का पुरुषार्थ बोलता है, अन्तर्पट के द्वार खोलता है। भिक्षु के बलिदानों की कहानी किसी से अनजानी नहीं।
इस अवसर पर तीनों ही दिन साध्वी सौभाग्ययशाजी ने सुमधुर गीतों का गायन भी किया।
साध्वी कल्याणयशाजी ने कहा - 'आचार्य भिक्षु क्रांतिकारी थे, जिन्होंने भगवान महावीर की वाणी को अपना साध्य बनाया और अपने अध्यात्म बल को साधन। उनका लक्ष्य था - घर-घर, देश-देश में आत्मा का संदेश पहुँचाना।'
उत्तर मध्य दिल्ली सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र गोलछा, मंत्री प्रकाश पारख, विजय सिंघी, सीता भंसाली एवं चारु बांठिया ने अपने विचारों की प्रस्तुति भाषण, कविता एवं गीतिका के माध्यम से की।
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समा बांधा।